ब्यावर(अमर छत्तीसगढ़) 13 मई . समता भवन मे आज आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने बताया दुसरो को देखना ही हमारा पतन निश्चित है, व्यक्ति सोचता है मन की सारी सुविधा मिल जाये सारी परिस्थिति अनुकूलता मे हो जाए यह संभव नही होता इसके लिए राग द्वेष को खत्म करना पडेगा,मोह राग की अनुकूलता शरीर के लिए होती है, ऐसा लगता हे हम दुसरो के लिए जी रहे हे अपनी आत्मा के लिए सोच ही नही रहे।
म सा ने कहा दो चीजे राग द्वेष है जो आज सबकी पंसद बनता जा रहा है,इनके कारण हम उलझते जा रहे है और अनुकूलता को ढूंढते जा रहे है मन नही लग पा रहा ढुंढते ढुंढते जिन्दगी बीत गयी फिर भी हम संतुष्ट नही हो सके, राग द्वेष मे जी रहे है इनको हटाये बिना समभाव मे नही रह पायेंगे।कर्मो के आवरण से कैसे बचे इस पर चिंतन करना होगा।
म सा ने कहा मन पंसद को दिमाग से निकाल दो तभी हम राग द्वेष को जीत पायेंगे। दुविधा मे गये बिना जीवन का कल्याण नही हो सकता, राग द्वेष के छुटते ही मन पंसद छूट जायेगा, तभी हम समभाव मे आ पायेंगे।म सा ने कहा जिस दिन हमने जन्म लिया उसी दिन से कर्म व मृत्यु हमारा पीछा करने मे लग गया।हमारी इच्छा अनुकूलता मन पसंद मे नही होनी चाहिए।
इससे पहले महासती श्री पराग श्रीजी म सा ने कहा अपनी प्रज्ञादृष्टि को इतना पवित्र बना देवे जो हम साधना के शिखर पर पंहुच सके।हम आज पांचो इन्द्रियों मे सुख खोज रहे है जो वास्तव मे दुखो का पहाड है।संघ प्रवक्ता नोरतमल बाबेलसाधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

