शिष्यों को जो संसार सागर से कराते पार उन गुरूओं को दुनिया रखती याद- कुमुदलताजी

शिष्यों को जो संसार सागर से कराते पार उन गुरूओं को दुनिया रखती याद- कुमुदलताजी

भीलवाड़ा राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) ,26 जुलाई। जीवन में तीन प्रकार के गुरू होते है पत्थर,कागज ओर काष्ट (लकड़ी) के। इनमें सबसे योग्य व महान गुरू काष्ट की तरह होते है जो किसी भी हाल में अपने शिष्य को डूबने नहीं देते है ओर उसे किनारे पहुंचाते है। ऐसे गुरूओं को हमेशा संसार याद ओर नमन करता है।

कुछ गुरू कागज की तरह होते है जो शिष्य को योग्य बनाने के लिए पूरा प्रयास करते है ओर दायित्व निभाते है। उन गुरूओं से बचना चाहिए जो पत्थर समान होते है खुद भी डूबते है ओर जो साथ में हो उसे भी डूबा देते है।

ये विचार अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. ने शनिवार को आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर श्रीसंघ के तत्वावधान में दिवाकर कमला दरबार में आचार्य आनदंऋषिजी म.सा. की 125वीं जयंति, उपाध्याय केवलमुनिजी म.सा. की जयंति एवं दादा गुरूदेव पूज्य नंदलालजी म.सा. की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन ज्ञान दिवस पर प्रवचन में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि जो बचपन में जागृत होकर दीक्षा ले लेता है उसकी जवानी संवर जाती है ओर जिसकी जवानी संवर गई उसका बुढ़ापा भी संवर जाता है।

तीन दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन रविवार को गुणानुवाद सभा होगी। धर्मसभा में स्वर साम्राज्ञी महासाध्वी महाप्रज्ञाजी म.सा.ने मधुर स्वरों में भजन के माध्यम से उपाध्याय केवलमुनिजी म.सा. की पुण्यतिथि पर भावाजंलि अर्पित की।

धर्मसभा में वास्तुशिल्पी पदमकीर्तिजी म.सा. ने कहा कि आसमान से पानी ओर यहां जिनवाणी बरस रही है। पानी शरीर को सुधारता है ओर जिनवाणी हमारे जीवन को सुधार देती है।

सुख दुःख हर व्यक्ति के पास होते है लेकिन वह उन्हें नहीं पहचान दूसरों में इसको ढूंढता है। हमे जो प्राप्त हुआ है उसमें सुखी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार में हर व्यक्ति कार्य करता है ओर व्यक्ति की उसके कार्य के कारण ही पूजा होती है।

संसार में सज्जन ओर दुर्जन दोनों तरह के व्यक्ति होते है हमे सज्जन की संगति करनी चाहिए ओर दुर्जन से दर रहना चाहिए। दुर्जन की संगति सज्जन को भी बिगाड़ देती है ओर सज्जन की संगति दुर्जन को भी सुधार सकती है इसलिए हमेशा संगत अच्छे ओर भले लोगों की करनी चाहिए।

धर्मसभा में विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। कई श्रावक-श्राविकाओं ने तेला,बेला,उपवास,आयम्बिल, एकासन, तप के प्रत्याख्यान भी लिए।

धर्मसभा में मुंबई से पधारे जसराज जैन, नवीनभाई जैन,बेंगू के मजिस्ट्रेट पीयूष ढेलिया आदि अतिथियों का स्वागत आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति सुभाषनगर श्रीसंघ के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।

स्वागत करने वालों में चातुर्मास समिति के संयोजक महावीरसिंह चौधरी, अध्यक्ष दौलतमल भड़कत्या, सचिव राजेन्द्र सुराना, चातुर्मास समिति महिला मण्डल अध्यक्ष निर्मला भड़कत्या, श्री जैन दिवाकर महिला मण्डल की अध्यक्ष सुमित्रा बोथरा,मंत्री सुनीता गांधी, सुभाषनगर महिला मंडल की अध्यक्ष टीना बापना,मंत्री राखी खमेसरा आदि शामिल थे। धर्मसभा का संचालन चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने किया।

प्रशनमंच में उत्साह के साथ महिलाओं ने की सहभागिता

वास्तुशिल्पी साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा. एवं विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा. के सानिध्य में शनिवार दोपहर सुभाषनगर स्थानक में महिलाओं के लिए प्रश्नमंच का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साह के साथ सहभागिता की।

प्रश्नमंच में उर्मिला नाहर एवं रितु नाहर प्रथम, पारसदेवी गुगलिया एवं प्राची संचेती द्वितीय एवं विमला डांगी एवं रचना बम्ब तृतीय स्थान पर रहे।

प्रश्नमंच का संयोजन महिला मण्डल की निर्मला भड़कत्या, लाड़जी मेहता, शकुन्तला खमेसरा, विमला गोखरू, राखी खमेसरा, नेहा छाजेड़, आदि ने किया। चातुर्मास में प्रत्येक शनिवार दोपहर प्रश्नमंच का आयोजन किया जा रहा है।

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