स्वयं के दुख,तनाव,मुड़ ऑफ का कारण दूसरे नहीं टू मच थिंकिंग,व्यर्थ चिंतन है.. परमात्मा से रिश्ता जोड़ उन्हें प्रेम से याद करे

स्वयं के दुख,तनाव,मुड़ ऑफ का कारण दूसरे नहीं टू मच थिंकिंग,व्यर्थ चिंतन है.. परमात्मा से रिश्ता जोड़ उन्हें प्रेम से याद करे

भिलाई(अमर छत्तीसगढ़) 18 जुन। :-  जो हर कार्य कल पर छोड़ते है वो अलबेलापन आलस्य के संस्कार के अधीन है, कल और काल का कोई भरोसा नहीं,हर घड़ी अंतिम घड़ी,
आदि अविनाशी सत्तोप्रधान आत्म निश्चय से सृष्टि रूपी रंगमंच पर कर्म करे।पुरुषार्थ फर्स्ट है,जिसके आधार पर प्रालब्ध बनती है।

यह बातें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा सेक्टर 7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ प्रवास में अहमदाबाद से आई युवा प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका तथा वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका राजयोगीनी ब्रह्माकुमारी चंद्रिका दीदी जी ने कही।
आपने बताया कि सृष्टि कर्म और न्याय के सिद्धांत पर चलती है।
आपने कर्मयोगी की परिभाषा बताया कि कर्मयोगी वह है जो कर्म के कल्प वृक्ष की डाली पर बैठ कर्म करते भी उपराम स्थिति में रहे।

इस अवसर पर डिवाइन ग्रुप के बच्चों ने सुंदर सांस्कृतिक स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया।
इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका राजयोगिनी हेमलता दीदीजी और राजयोगिनी आशा दीदी जी ने हेमलता दीदी जी हृदयपूर्वक आभार व्यक्त किया।
24 जून मातेश्वरी जगदम्बा जी की पुण्य स्मृति दिवस व अंतर्राष्ट्रीय योग मास के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का बड़ी संख्या में ब्रह्मा वत्सो ने लाभ लिया।

Chhattisgarh