ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 18 जुलाई।
आचार्य श्री रामेश व उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म सा की विशेष कृपा से समता भवन मे लगातार नैतिकता पर प्रवचन चल रहा है शासन दीपिका श्री पराग श्री जी म सा ने कहा हमे भगवान महावीर के वचनो के अनुरुप अपने जीवन को सुधारने का प्रयत्न करना होगा उसके लिए हमे सुदेव सुगुरु सुधर्म पर श्रद्धा रखनी होगी।
म सा ने कहा शुद्धि तीन होती मन वचन काया से शुद्धि करे इन तीनो की पहचान करने से हमारी श्रद्धा द्दढ मजबूत होगी और यही श्रद्धा सम्यकत की प्राप्ति हो कराती है हमारी राजा श्रेणिक जैसी मन वचन काया से शुद्धि होनी चाहिए।
म सा ने कहा आज व्यक्ति बहुत बडे भीखारी बनते जा रहे क्योंकि उनकी देव गुरु धर्म पर श्रद्धा नही होने से जगह जगह भटकते रहते और मांगते रहते हैं और मस्तष्क टिकाते जा रहे है।
म सा ने कंहा हमारा मस्तष्क देव गुरू धर्म के अलावा कही ओर नही टिकना चाहिए न उनसे कुछ मांगे, वीतराग वाणी की श्रद्धा का खुन एक एक कण मे होना चाहिए ताकि मोक्ष मिल सके उससे पहले भीतर मे अनुकम्पा रहे और सम्यकत दृष्टि बने।
म सा ने कहा हमने जीवन मे परिवार के खातिर इतना कर्मो का बंध कर लिया जो कोई भी काम नही आयेगा इन कर्मो के भोगे बिना छुटकारा नही मिल सकेगा। अपने जीवन को सुधारे धर्म ही आत्मा के लिए है जो हमारा उद्धार कर सकेगा।
म सा ने कहा आत्मा की शुद्धि कई प्रकार की होती है आत्मा की शुद्धि करने से मन मे ताजगी भरती है आचार शुद्धि, व्यवहार शुद्धि, आहार शुद्धि व विचार शुद्धि होने से अपना जीवन सुधर जाता है।
इससे पहले महासती श्री प्रखर श्रीजी म सा ने
कहा भगवान महावीर की जिनवाणी कहती है यह जीवन मेरा नही है जो भी परिसर्ग आते है वह शरीर को आते है, यही साधु सोचते हे चिंतन करते है जो परिसर्ग आते वो शरीर का है जो शरीर मेरा नहीं। आज लोगो हवा उडाने मे देर नही लगाते।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

