चोट और अनुभव ही संसार की सच्चाई समझाते हैं : साध्वी मंजुलाश्रीजी

चोट और अनुभव ही संसार की सच्चाई समझाते हैं : साध्वी मंजुलाश्रीजी

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 25 अगस्त । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए मंगलवार को साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने रिश्तों, सेवा और जीवन के अनुभवों पर प्रवचन दिया।

साध्वीश्री ने कहा कि कई बार जिसे हम नौकर कहते हैं, वह धीरे-धीरे घर का सदस्य बन जाता है। वह केवल नौकरी करने नहीं आता, बल्कि परिवार का हिस्सा बनता है और कई बार हमें भी कुछ बनाने में अपनी भूमिका निभाता है। जीवन में जब उम्र बढ़ जाती है और संतान भी साथ छोड़ देती है, तब वही व्यक्ति काम आता है जो वर्षों से आपके सुख-दुख में आपके साथ खड़ा रहा।

उन्होंने एक प्रसंग के माध्यम से समझाया कि एक व्यक्ति के तीन बेटे थे। उसके पास काफी संपत्ति थी। एक दिन उसने अपनी संपत्ति के चार हिस्से कर दिए। तीन हिस्से बेटों के और चौथा हिस्सा उस नौकर के नाम कर दिया, जिसने वर्षों तक परिवार की सेवा की थी।

बेटों ने जब पूछा कि चौथा हिस्सा किसका है, तो पिता उन्हें संत के पास लेकर गए और कहा, “महाराज, यह मेरा चौथा बेटा है। मैं अपनी संपत्ति का चौथा हिस्सा इसके नाम कर रहा हूं।”

साध्वीश्री ने कहा कि रिश्ते केवल खून से नहीं बनते, रिश्ते व्यवहार, सेवा और समर्पण से भी बनते हैं। जिसने जीवनभर आपके साथ खड़े होकर आपकी सेवा की, उसे केवल उसके काम के नाम से पहचानना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि जीवन में चोट लगना भी जरूरी है। जब तक चोट नहीं लगेगी, तब तक संसार की वास्तविकता समझ में नहीं आएगी। सुख के समय हर कोई अपना दिखाई देता है, लेकिन कठिन समय ही बताता है कि वास्तव में कौन अपना है और कौन केवल नाम का अपना है।

साध्वीश्री ने कहा कि जीवन की हर चोट हमें कुछ सिखाने आती है। इसलिए कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनसे सीखना चाहिए। संसार को समझना है तो अनुभव जरूरी है और अनुभव के लिए जीवन की ठोकरों को स्वीकार करना पड़ेगा।

इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदसमुघा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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