बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 9 सितंबर। श्री जैन श्वेतांबर श्री संघ समाज के द्वारा परम पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व 2026 को बुधवार की सुबह विशेष पूजा, सामायिक, कल्प सूत्र का वाचन, शाम को प्रतिक्रमण एवं रात्रि में बच्चे, महिलाओं, पुरुषों के द्वारा कई जैन धार्मिक भक्ति प्रस्तुत किया गया ।
भक्ति गीतों में नवकार धुन मंत्र…हम जैन है करम से जैन है… दुनिया से मैं हारा….चिंतामणी मारी चिंताचूर…. ओ गुरु सा…. जनम जनम का साथ है…. जैसे कई भक्ति प्रस्तुत किए गए । पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन गुजराती जैन समाज टिकरापारा, वैशाली नगर में तेरापंथ समाज एवं नेहरू नगर श्री जैन श्वेतांबर श्री संघ द्वारा कई धार्मिक आयोजन संपन्न हुए ।
श्वेतांबर समाज – नेहरू नगर
समाज की श्रीमती ज्योति चोपड़ा एवं श्रीमती शोभा मेहता द्वारा कल्प सूत्र का वाचन किया गया । रात्रि में भक्ति संध्या में समाज की महिलाओं ने एवं बच्चों ने भक्ति गीत प्रस्तुत किया गया । पर्यूषण पर्व में प्रतिदिन भवन में प्रतियोगिताएं कराई जा रही है । इस अवसर पर समाज के संरक्षक विमल चोपड़ा, नरेंद्र मेहता, सुभाष श्रीश्रीमाल, दिनेश मुनोत, रूपेश गोलछा, तुषार मेहता, ज्योति चोपड़ा, संगीता चोपड़ा, सुनीता जैन, अभिनव जैन सहित समाज के सदस्य उपस्थित थे।

बोली का लाभ
पर्यूषण पर्व शांति कलश एवं आरती के लाभार्थी श्रीमती सुनीता जैन, पांच ज्ञान की बोली लाभार्थी श्री सुभाष चंद्र अनुराग श्रीश्रीमाल, पोथी की बैहराने की बोली लाभार्थी श्रीमती किरण शर्मा, मूल नायक भगवानजी की आरती लाभार्थी हीरचंद संजय संजीव चोपड़ा
गुजराती जैन समाज टिकरापारा
श्री दशाश्रीमाली स्थानकवासी जैन संघ में व्याख्यान देने आए स्वधर्मी बहनों ने प्रवचन में बताया कि आज पर्युषण महापर्व का दूसरा दिन है। अहमदाबाद से पधारी मीना बेन, राजूल बेन, मिशी बेन ने नवकार महामंत्र का विस्तार वर्णन करके समझाया कि नवकार महामंत्र को सभी मंत्रों से बड़ा क्यों माना जाता है और इस महामंत्र क्यों कहा जाता है इसका पूर्ण विवरण समझाया।

और प्रत्येक जैन श्रावक- श्राविका को रोज दिन में एक बार नवकार मंत्र की माला का जाप करना चाहिए इसके बाद मानव जीवन में जैन धर्म में किए जाने वाले तप – तपस्या के बारे में समझाया की जैन धर्म में हर एक तप का महत्व है और इस तप को करने के बाद मनुष्य अपने तन और मन को पूर्ण रूप से स्वस्थ और शांत बनता है । प्रश्न मंच का भी कार्यक्रम किया गया जिसमें समाज के सभी वर्ग ने हर्ष उल्लास के साथ भाग लिया और धर्म के बारे में ज्ञान प्राप्त किया।

व्याख्यान में समाज के अध्यक्ष भगवान दास भाई सुतारिया, सचिव गोपाल वेलाणी, शरद दोशी ,दीपक गांधी, मनीष शाह, राजू तेजाणी,कीर्ति गांधी, हेमंत सेठ, हसमुख कोठारी, प्रदीप दामाणी, प्रफुल्ल मेहता, उर्मिला तेजाणी, हेमा तेजाणी, मनीषा कपाड़िया, अमिता सुतारिया, सुधा गांधी, देवीला सुतारिया एवं समाज के अन्य सभी उपस्थित थे।

तेरापंथी समाज वैशाली नगर
आज स्वाध्याय दिवस पर उपासिका श्रीमति भाग्यश्री सूर्या एवं श्रीमती लक्ष्मी मेहता द्वारा आत्मचिंतन और ज्ञानार्जन का संदेश दिया गया। पर्युषण महापर्व के अंतर्गत आज स्वाध्याय दिवस श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। जैन धर्म में स्वाध्याय का अर्थ केवल ग्रंथों का अध्ययन करना नहीं, बल्कि उनके संदेश को जीवन में आत्मसात कर अपने आचरण को शुद्ध एवं संयमित बनाना भी है। स्वाध्याय आत्मविकास, आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक उन्नति का सशक्त माध्यम है।
जैन परंपरा के अनुसार कालचक्र (समय चक्र) अनादि और अनंत है, जो निरंतर परिवर्तनशील रहता है। इसमें उत्सर्पिणी (उन्नति का काल) और अवसर्पिणी (अवनति का काल) के क्रम चलते रहते हैं। वर्तमान समय अवसर्पिणी का काल माना गया है, जिसमें धर्म, संयम और नैतिक मूल्यों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। ऐसे समय में स्वाध्याय, साधना और सदाचार के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को उन्नत कर सकता है तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
पर्युषण पर्व का संदेश है कि हम ज्ञान, संयम, तप और आत्मचिंतन के द्वारा अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाएं तथा मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करें। स्वाध्याय दिवस हमें यही प्रेरणा देता है कि बदलते कालचक्र में भी धर्म और सदाचार के मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ते रहें। इस अवसर पर सुरेन्द्र मालू, चंद्र प्रकाश बोथरा, विनोद लूणीया, प्रदीप दुग्गड़, हनुमान बोथरा, सुमित बोथरा, भीखम दुग्गड़, मेहुल, रमेश नाहर,शीला छल्लानी अंजू गोलछा,लक्ष्मी जैन,ललिका मालू, भावना बोथरा, कुसुम लूणीया, अर्चना नाहर, शांति दुग्गड़, कंचन बोथरा, निकिता गोलछा, इत्यादि उपस्थित थे।

