‎हम उन चीजों के लिए समय गंवा देते हैं जो हमारे लिए जरूरी है -श्रेयांशप्रभ जी

‎हम उन चीजों के लिए समय गंवा देते हैं जो हमारे लिए जरूरी है -श्रेयांशप्रभ जी


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‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 3 अक्टूबर । ” हम उन चीजों के पीछे में समय गंवा देते हैं जो हमारे लिए जरूरी भी नहीं है और जो जरूरी है हम उसकी ओर ध्यान ही नहीं देते।” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने  व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम दिखावे के पीछे भाग रहे हैं। दिखावा कोई काम का नहीं है।आपका दिल, आपका व्यवहार ही आपके काम का है।
‎              मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्ल्भ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि जब इंसान के पास कोई विकल्प नहीं होता तभी वह सोना – चांदी और जमीन बेचने की बात सोचता है।

उन्होंने कहा कि हमें भगवान की दया से ही सब कुछ मिला है इसलिए जहां जो कर सकते हैं, जितना दान कर सकते हैं करना चाहिए। हमें जितना श्रम करना चाहिए हम उतना श्रम नहीं करते। हम लोगों से कहते हैं कि जितना करना था,मैंने कर लिया जबकि वास्तविक बात यह है कि ऐसा कहकर हम स्वयं से ही झूठ बोल रहे हैं।


‎ मुनि श्री श्रेयांशप्रभ ने आगे कहा कि जगह और स्थान के अनुरूप कोई ना कोई एक मुख्य होता है किंतु इसका यह मतलब नहीं है कि हम बाकी साथियों की ओर ध्यान ना दे। हम अपने साथियों के लिए जो कर सकते हैं,अवश्य करें, ऐसा करके हमें आत्मिक खुशी ही मिलेगी। इस दुनिया में जब सभी जीव मेरे हैं और मैं इस दुनिया का हूं तो फिर मैं इस दुनिया के लिए क्यों ना कुछ करूं। हमें यह सोचना चाहिए कि मैं जो कर रहा हूं,वह अपने लिए कर रहा हूं किसी नाम के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि कुछ करने का मौका मिला है तो कर लो। हमारे से यदि किसी का भला हो जाए तो यह जीवन की उपलब्धि ही होगी।
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