बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 1 मार्च। छत्तीसगढ़ के पंचायत विभाग के निलंबित जॉइन्ट डायरेक्टर अशोक चतुर्वेदी को हाईकोर्ट ने राहत देने से मना कर दिया है। निलंबित जॉइन्ट डायरेक्टर ने ACB की FIR निरस्त करने की याचिका दायर की थी। जिसे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र अग्रवाल ने ख़ारिज कर दिया है।
केस की सुनवाई के दौरान ACB ने कोर्ट को बताया कि सेवाकाल के दौरान अफसर की कुल आय 68 लाख रुपए थी। जबकि उनसे 31 करोड़ की चल- अचल संपत्ति के दस्तावेज और सबूत मिले हैं। जिसके बाद कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
पंचायत एवं ग्रामीण विभाग के जॉइन्ट डायरेक्टर अशोक चतुर्वेदी के खिलाफ ACB ने आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया है। इससे पहले ACB ने उनकी संपत्ति की जांच की थी। जिसके बाद उनके ठिकानों में छापेमारी की गई थी।
जांच के बाद 28 अगस्त 2023 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई। जिसके बाद से यह मामला अब तक विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट), रायपुर की अदालत में ट्रायल पर है।
इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी अफसर के खिलाफ साक्ष्य मिलने पर राज्य शासन ने उसे सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही ACB की टीम उसकी तलाश भी कर रही थी। इस बीच आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को निरस्त करने की मांग की गई थी।
इस मामले में हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि उनका रिकॉर्ड साफ है और वह जांच का सामना करने को तैयार है। अफसर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने राजनीतिक दुर्भावना के तहत कार्रवाई की थी।
पत्नी को FIR में आरोपी नहीं बनाया गया था। लेकिन अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया गया है। बिना वैध पूर्व स्वीकृति के रिपोर्ट दाखिल की गई है, जो कानून के खिलाफ है।
हाईकोर्ट में जवाब प्रस्तुत कर राज्य सरकार ने बताया कि, FIR के मुताबिक अधिकारी की सेवा अवधि यानी 3 मार्च 2001 से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक उनका कुल वेतन 68 लाख 89 हजार 344 रुपए रहा। वहीं पत्नी की आय 23 लाख 60 हजार 845 रुपए बताई गई। जबकि जांच एजेंसी के मुताबिक, दोनों के पास 31 करोड़ 65 लाख 82 हजार 400 रुपए की संपत्ति है।
राज्य सरकार ने छह संपत्तियों का विवरण देते हुए बताया कि, इनकी एक संपत्ति ग्राम तेंदुआ, तहसील नवागढ़ में है। इसकी कीमत 1 करोड़ 10 लाख रुपए आंकी गई है। इसमें 30 लाख भूमि और 80 लाख कथित विकास कार्य के लिए बताए गए हैं। इसके अलावा अधिकारी ने बीमा पॉलिसियों में 22 लाख 31 हजार 47 रुपए और विविध खर्चों में 5 लाख 50 हजार रुपए का निवेश किया है।
इस पूरे मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं और आरोप- पत्र भी दाखिल हो चुका है। ऐसे में जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना जरूरी है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने निलंबित जॉइन्ट डायरेक्टर अशोक चतुर्वेदी की याचिका खारिज कर दी है।