जयपुर (अमर छत्तीसगढ) 10 जुलाई। तिलक नगर के सूर्य मार्ग स्थित सामुदायिक भवन के नवकार भवन के प्रवचन मंडपम् में गुरुवार को नानेश पट्टधर जैनाचार्य विजयराज म.सा. ने चातुर्मास प्रवचन श्रंखला में चातुर्मास की स्थापना व गुरु पूर्णिमा के महत्व और उद्ेश्य की सरल एवम सहजता से व्याख्या की। जिसका श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं ने पूरी श्रद्धा आस्था से रसपान किया।
जैनाचार्य बोले…. व्यक्ति के चारित्र निर्माण में गुरु की महत्ती भूमिका है
जैनाचार्य प्रवर ने अपनी मर्म स्पर्शी वाणी ने कहा कि जो जगावे वह गुरु है। व्यक्ति के चरित्र निर्माण में गुरु की महत्ती भूमिका होती है। गुरु व्यक्ति के अंत:करण को जगाने का काम करता है। सौभाग्यशाली व्यक्ति को ही सच्चा और अच्छा गुुरु मिल पाता है। जो अपने ज्ञान और तप के जरिए व्यक्ति के अंत:करण को शुद्ध कर चरित्र का निर्माण करता है।
अच्छे गुरु में दिव्यभाव होता है, वह अपने शिष्य को अपने ज्ञान से शिक्षा, धर्म और अध्यात्म की ओर प्रेरित कर उसके जीवन के चरित्र का निर्माण करता है।
चातुर्मास में साधु संत चार बातों की दिव्य आराधना करते है
प्रवचन प्रभाकर जैनाचार्य श्री विजय गुरुदेव ने फरमाया चातुर्मास के महत्व के बारे बताते हुए कहा कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा से चातुर्मास की स्थापना हो जाती है।जो कार्तिक माह की पूर्णिमा तक चलता है। चौमासे में चार महीने साधु-संतों के लिए यह स्थिरता का चतुर्मास होता है, यानि इन चार महीनों में साधु-संत स्थिर रहकर चार बातों की अराधना करते हैं, इनमें सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र और सम्यक तप है।
इन चार महीनों में साधु-संत वर्कशॉप में शरीर को रिपेयर करते हैं। जबकि श्रावक-श्राविकाओं के लिए यह चार माह साधना के होते हैं। इनमें वे सुपात्र दान, शील का पालन,तप और भावना से प्रेरित होते हैं। इससे पहले आठ महीने साधु-संत विचरण कर गोचरी के माध्यम से जगह-जगह धर्म की प्रेरणा देते हैं।
जैनाचार्य प्रवर ने अपनी धर्म देशना के दौरान ही पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध वैज्ञानिक दौलत सिंह कोठारी का एक वाक्या भी सुनाया।उन्होंने कहा कि उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी।उन्होंने कोठारी को राष्ट्रपति या फिर रक्षा मंत्री बनने का ऑफर दिया।लेकिन दौलत सिंह ने इन सबको ठुकराते हुए जैन मुनि बनने की इच्छा व्यक्त की।
जिसको है अपनी पहचान,उसको मिलते है भगवान भक्तिगीत से सराबोर हुए भक्त…
इस अवसर पर जैनाचार्य प्रवर ने श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं को एक भक्ति पूर्ण भजन ‘ जिसको है अपनी पहचान उसी को मिलते हैं भगवान…नश्वर मानव की है काया…घर में लाखों की है माया…उसमें होता नहीं मस्तान…’सुनाकर मंडपम् को भक्ति भावों से सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर संत विनोद मुनि म.सा. ने दुर्लभता व सुलभता की व्याख्या की।
साता वेदनीय एवम संवाद से समाधान पुस्तकों का हुआ विमोचन…
इस मौके पर साध्वी वीणाश्री म.सा. द्वारा संकलित दो पुस्तक सातावेदनीय व संवाद से समाधान का विमोचन मुम्बई के वरिष्ठ हरिश भाई रावत व तपस्विनी बहन नीतू ढाबरिया ने जैनाचार्य प्रवर की पावन निश्रा में किया। यह दोनों पुस्तक आचार्य विजयराज म.सा. के बीकानेर प्रवास के दौरान दिए गए प्रवचनों पर आधारित है।
श्रद्धालुओं ने तप त्याग से अपनी आत्मा को कुंदन बनाया
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आज के दिन सेंकडो श्रावक श्राविकाओं ने उपवास,एकासन,
बेला,तेला तप की आराधना कर अपनी आत्मा को कुंदन बनाया। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों एवम जयपुर के विभिन्न उपनगरों से भारी तादाद धर्म श्रद्धालु आज धर्मसभा में उपस्थित थे।
धर्म सभा में अनुपम मुनि,दिव्यम मुनि,मंथनप्रभ मुनि,सूरजप्रभ मुनि, विरलप्रभ मुनि व महाश्रमणी रत्ना प्रभावती जी,पदमश्री,नेहाश्री जी,निशांतश्री जी समेत 20 साध्वीयां मौजद थी।
धर्म सभा का संचालन संघ महामंत्री नवीन लोढ़ा ने किया व पधारे हुए सभी श्रद्धालुओं का स्वागत व आभार संघ संरक्षक प्रदीप गुगलिया एवम संघ अध्यक्ष महेश दस्सानी ने किया।
प्रकाश जैन,वरिष्ठ पत्रकार

