भीलवाड़ा(अमर छत्तीसगढ़) ,11 जुलाई। चातुर्मास में तीन बाते सीेखने को मिलती है कम खाना,गम खाना ओर नम जाना। ये तीन बाते हमने अपने जीवन में उतार ली तो चातुर्मास सार्थक हो जाएगा। जिनशासन में तपस्या की शुरूआत भगवान आदिनाथ से हुई। तपस्या रसेन्द्रिय भी नियंत्रण रखना सीखाती है। एकासन भी कम खाने का दिन है। इतिहास में कम खाने वाले को ही याद किया जाता है। कम खाने से शरीर भी स्वस्थ रहता है।

ये विचार अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. ने आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर श्रीसंघ के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मास में शुक्रवार को धर्मसभा में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि हमारा खानपान ओर आचरण शुद्ध होगा तो हर कठिनाई से बच सकते है। वर्षावास भव भम्रण कम करने के लिए होता है। वर्षावास में ऐसी वाणी नहीं बोले जो किसी की आत्मा को ठेस पहुचाएं। उन्होंने जीवन में नियमित ध्यान साधना करने का महत्व समझाते हुए कहा कि भगवान आदिनाथ के प्रथम पुत्र भरत ने ही ध्यान की शुरूआत की थी।

धर्मसभा में स्वर साम्राज्ञी महासाध्वी महाप्रज्ञाजी म.सा.ने कहा कि चातुर्मास जीवन में जागृति का समय लेकर आता है। महावीर की वाणी सुनकर जागृत हो जाए तो संसार के संताप नष्ट हो जाते है। बाहर की आंखे खोलने पर जगत का दीदार होता है ओर अंतर की आंखे खोलने पर परमात्मा के दर्शन होते है। चातुर्मास अंतर चक्षु खोलने का अवसर है।

उन्होंने बारिश में गमनागमन से बचने की प्रेरणा देते हुए कहा कि बारिश के मौसम में अनंत जीवों की उत्पति हो जाती है इसीलिए भगवान महावीर ने श्रमण श्रमणियों एवं साधक साधिकाओं के लिए चार माह के वर्षावास का प्रावधान किया है।
उन्होंने मानव जीवन को अनमोल बताते हुए कहा कि हम जागृत हो गए तो कायाकल्प हो जाएगा ओर सो गए तो सब कुछ खो देंगे। जीवन राम, कृष्ण, महावीर ,बुद्ध की तरह जीएंगे वह सार्थक हो जाएगा ओर दुनिया से जाने के बाद भी लोग याद करेंगे।

महासाध्वी ने प्रेरक संदेश देने वाले मधुर भजनों की भी प्रस्तुति दी। वास्तुशिल्पी साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा. एवं विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा. आदि ठाणा का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में बेंगूलौर से पधारे जैन कॉन्फ्रेंस जीवन प्रकाश योजना के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल रांका भी मौजूद थे।

अतिथियों का स्वागत चातुर्मास समिति के अध्यक्ष दौलतमल भड़कत्या, सचिव राजेन्द्र सुराना, सुभाषनगर श्रीसंघ के अध्यक्ष हेमन्त कोठारी, ने किया। संचालन चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने किया। कई श्रावक-श्राविकाओं ने तेला,बेला,उपवास,आयम्बिल, एकासन, तप के प्रत्याख्यान भी लिए।

धर्मसभा में भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों सहित मुंबई, मैसूर, बेंगलौर, चित्तौड़गढ़, बिजयनगर, गुलाबपुरा सहित कई स्थानों से आए श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। नियमित चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.45 से 10 बजे तक होंगे। चातुर्मास में हर गुरूवार को मंगलकारी अनुष्ठान, हर शुक्रवार को पद्मावती एकासन आराधना विधि, हर शनिवार को प्रवचन के बाद प्रश्नमंच एवं हर रविवार को ही दोपहर 2 बजे से बच्चों के लिए संस्कार शिविर का आयोजन होगा। चातुर्मास में प्रतिदिन सुबह 8.45 बजे से प्रवचन, दोपहर 2.30 से 4 बजे तक धर्मचर्चा एवं नित्य प्रतिक्रमण सूर्यास्त के बाद होगा।

चातुर्मास के पहले शुक्रवार को सैकड़ो श्रावक-श्राविकाओं ने की पद्मावति एकासन आराधना
पूज्य महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में हर शुक्रवार को सुबह 11 बजे से होने वाली पद्मावती एकासन आराधना के तहत पहला एकासन विधि सम्पन्न कराई गई। माता पद्मावती की आराधना करते हुए एकासन विधि वास्तुशिल्पी साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा. ने सम्पन्न कराई।
उन्होंने बताया कि चातुर्मास में 16 शुक्रवार को पद्मावती एकासन कराने का क्या महत्व है ओर जीवन में इससे किस तरह के बदलाव महसूस किए जा सकते है। चातुर्मासिक पहली पद्मावती एकासन आरधना को लेकर उत्साह का माहौल रहा ओर भीलवाड़ा शहर व आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ो श्रावक-श्राविकाएं इसमें शामिल हुए।

चातुर्मासिक प्रथम शुक्रवार को पद्मावत एकासन आराधना का लाभ चांददेवी,सुभाषचन्द्र-बादामदेवी,महावीर-संगीता,ललित-नीता बाबेल परिवार एवं मनोजकुमार,मेहुलकुमार,अवयुक्त रारा परिवार रहा। लाभार्थी परिवारों का स्वागत महिला मण्डल की निर्मला भड़कत्या एवं लाड़ मेहता ने किया।
(निलेश कांठेड़ मीडिया प्रभारी)

