पूना महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ़)21 जुलाई। श्रमण संघीय द्वितीय पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य श्री आंनदऋषिजी म.सा. की 126वीं जयंति के उपलक्ष्य में श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, बिबवेवाड़ी पूना के तत्वावधान में रसिकलाल एम.धारीवाल स्थानक भवन में पांच दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन सोमवार को पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा के सानिध्य में सुबह प्रवचन से पहले महामंगलकारी लोगस्स जाप की आराधना की गई।
जाप के माध्यम से सभी तीर्थंकरों की भी भक्ति की गई ओर परिवार से लेकर समाज व राष्ट्र तक हर जगह मंगल व प्रगति की कामना की गई।
पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि लोगस्स का जाप हमारे जीवन की नकारात्मकता को दूर कर पॉजिटिव उर्जा का जीवन में संचार करता है। इससे पूरा वातावरण पवित्र व आनंददायी बन जाता है। इस जाप में पूना व आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ो श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए।
जाप के बाद प्रवचन में युवारत्न श्री नानेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि पूज्य आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. जैसे महापुरूषों का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है ओर उनके गुणों को शब्दों में बताना बहुत कठिन है। त्याग, तपस्या व ज्ञान की त्रिवेणी प्रवाहित करने वाले राष्ट्र संत आचार्यसम्राट श्री आंनदऋषिजी म.सा. का पूरा जीवन सेवा व मानवता की भावना से ओतप्रोत रहा।
करूणा के सागर व दीन दुःखी को देख ह्दय द्रवित हो जाने वाले ऐसे महापुरूष ने जिनशासन की भरपुर प्रभावना की ओर उनका जीवन आज भी लाखों भक्तों को प्रेरणा प्रदान करता है। धर्मसभा में प्रज्ञारत्न श्री हितेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि आनंद गुरू सबको आनंद देने वाले बन गए।
संघनायक व आचार्य आनंद गुरू जैसे उन महापुरूषों को उनके गुणों के कारण दुनिया जाने के बाद भी याद करती है। पूज्य आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. के जीवन में कठोरता व कोमलता दोनों शामिल थे।
जहां कठोर होने की जरूरत होती वहां कठोरता बरतते ओर जहां कोमलता दिखाने की जरूरत होती वहां वैसा भाव भी प्रदर्शित करते थे। आगम व वैदिक साहित्य का गहरा अध्ययन करने वाले आनंद गुरू का जीवन सहज व सरल होने के साथ जिनशासन व मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा।
धर्मसभा में सेवारत्न श्री हरीशमुनिजी म.सा. एवं प्रार्थनार्थी श्री सचिनमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। चातुर्मास में त्याग तपस्याओं का दौर भी जारी है। श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास, एकासन,आयम्बिल, उपवास आदि तप के प्रत्याख्यान भी लिए।
आचार्य श्री आनंदऋषिजी म.सा. की जयंति पर पांच दिवसीय आयोजन के तहत तीसरे दिन मंगलवार को घंटाकर्ण महावीर स्रोत का जाप, 23 जुलाई को आनंद चालीसा का जाप एवं अंतिम दिन 24 जुलाई को सामायिक दिवस मनाते हुए 2-2 सामायिक करने के साथ ओम आनंद जाप होगा। चातुर्मास में नियमित प्रवचन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक हो रहे है।
श्रीसंघ सम्पर्क सूत्र-
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श्री माणिकचंदजी दुग्गड़, उपाध्यक्ष
मो. 9890940941
श्री गणेशलाल ओसवाल,महामंत्री
मो. 9921879613
श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, बिबवेवाड़ी पूना
प्रस्तुतिः अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन,

