श्री पांडव चरित्र नामक ग्रंथ के आधार पर जैन महाभारत विषय पर हुवा प्रवचन… उच्च आदर्श स्थापित करता है कि हम किसी भी कार्य को किस मानसिकता से करते हैं – कर्त्तव्य भाव या अधिकार भाव- मुनीराज शोभनतिलक

श्री पांडव चरित्र नामक ग्रंथ के आधार पर जैन महाभारत विषय पर हुवा प्रवचन… उच्च आदर्श स्थापित करता है कि हम किसी भी कार्य को किस मानसिकता से करते हैं – कर्त्तव्य भाव या अधिकार भाव- मुनीराज शोभनतिलक

रायपुर (अमर छत्तीसगढ) 23 जुलाई। श्री शांति कल्याण जैन संघ, आम्रपाली में प्रथम चातुर्मास की आराधना दीक्षा धर्म के महानायक प. पू. आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय योगतिलक सुरीश्वर जी महाराजा के सुशिष्य पूज्य मुनीराज शोभनतिलक विजय जी की निश्रा में हो रही है।

इसमें श्री पांडव चरित्र नामक ग्रंथ के आधार पर जैन महाभारत विषय पर प्रवचन हो रहे हैं। आज पूज्य श्री ने आगे बताया कि शांतनु राजा का वर्षों बाद अपने पुत्र गांगेय से मिलन हुआ। गांगेय की माता गंगादेवी जिन्होंने अब तक गांगेय को संस्कारों से सींचा था ।

उन्होंने विचार किया कि मैंने अपना स्वकर्त्तव्य पूरा किया और वो संसार का त्याग कर आत्म कल्याण हेतु संयम जीवन स्वीकार कर लेती है। पूज्य शोभनतिलक विजय जी ने कहा कि गंगादेवी का जीवन हमारे लिए उच्च आदर्श स्थापित करता है कि हम किसी भी कार्य को किस मानसिकता से करते हैं – कर्त्तव्य भाव या अधिकार भाव।

इधर महाराज शांतनु पुत्र गांगेय को लेकर हस्तिनापुर आते हैं। यह समाचार पाकर नगरजन गांगेय को देखने आते हैं। गांगेय के सद्व्यवहार एवं मधुर वचन सुनकर वें सभी के प्रिय बन जाते हैं। शांतनु राजा गांगेय को युवराज पद पर आसीन करते हैं।

संपूर्ण नगर में अत्यंत हर्ष एवं उत्सव का वातावरण बन जाता है। यहां पूज्य मुनीराज समझाते हैं कि गांगेय की यह व्यवहार कुशलता हमें भी बहुत कुछ सिखाती है कि हम अपने आस-पास के लोगों से कैसे व्यवहार करते हैं। मधुर वचन एवं अच्छा व्यवहार हमें सबके ह्रदय में स्थापित करता है।

श्री शांति कल्याण चातुर्मास समिति के सचिव कमलेश ललवानी ने बताया कि पूज्य गुरुदेव की निश्रा में अट्ठावीस लब्धि तप की आराधना हो रही है जिसमें प्रतिदिन एकासने की व्यवस्था संघ द्वारा रखी गई है जिसमें आज के के लाभार्थी निर्मल चंद ललिता देवी मुणोत परिवार रहे।

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