नगपुरा दुर्ग (अमर छत्तीसगढ़) 24 जुलाई। परमात्मा श्री महावीर स्वामी ने फ़रमाया कि जीव को आरंभ-समारंभ से बचना चाहिए। अहिंसा का अर्थ है किसी भी जीव को मन वचन काया से दुःख न पहुंचाना । आरंभ और समारंभ दोनों ही किसी न किसी रूप में हिंसा से जुड़े हुए हैं।, उक्त उद्गार श्री आचारांग सूत्र प्रवचन श्रृंखला में साध्वी श्री लब्धियशा जी म सा ने व्यक्त किए ।
उन्होंने कहा कि हमारी सोच और हमारी विचारधारा ही हमारे जीवन का प्रेरक तत्व है. प्रकृति का नियम है जो हम देते हैं वहीं वापस लौटता है. जैसे बीज हम बोते हैं, वैसे ही फल मिलते है. सकारात्मक सोच महान कार्यों का सृजन करती है वहीं नकारात्मक सोच भवोभव तक विनाश की ओर ही ले जाता है. सकारात्मक सोच तो जीवन का प्रसाद है, नकारात्मक सोच जीवन का अभिशाप. आज मानव समाज में संस्कारों के अभाव में संवेदना भी नहीं बची है।
पहले पड़ोसी भी परिवार का सदस्य ही होता था. पड़ोस की पीड़ा को व्यक्ति अपने घर की पीड़ा समझते थे, पड़ोसी की प्रत्येक समस्याओं को सुलझाने में भागीदार बनते थे. आज विडम्बना है कि पड़ोसी के लिए घर का दरवाजा ही नहीं दिल का दरवाजा भी बंद मिलता है.

पहले पड़ोस में जरा सी आवाज सुनाई देता तो व्यक्ति जागृत हो जाता था, आज हम समाचार पत्रों में पढ़ते हैं कि पड़ोसी की लाश 4-5 दिनों से पड़ा हुआ जब उसमें बदबू आने लगता है तब मालूम पड़ता है कि पड़ोसी की मृत्यु हो गई है. देश दुनिया का खबर रखने वाला इंसान अपने खुद के पड़ोसी का खबर नहीं रखता है.
उन्होंने कहा कि जीवन में संवेदना होना जरूरी है, साधन होने के बावजूद यदि संवेदना नहीं है ,यदि भावना नहीं है तो साधन भी निरर्थक हो जाता है. भावना कैसी है और किस उद्देश्य से प्रकट होती है इस पर परिणाम टिकता है।
आधुनिक समय में मनुष्य धन को ही सब कुछ मान बैठा है. सम्पति जरूरी है लेकिन उसका सदुपयोग भी जरूरी है. शास्त्र में धन की तीन गति बताई गई है दान, भोग और नाश, दान उत्तम मार्ग है, भोग मध्यम मार्ग है और नाश अधम मार्ग है.

दूसरों के प्रति करूणा का भाव और प्रेम से भी हम अपने एवं दूसरे के जीवन को धन्य कर सकते है।
श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ -नगपुरा में देशभर के सैकड़ों श्रद्धालु चातुर्मास आराधना कर रहे हैं, प्रवचन के साथ ही नित नये अनुष्ठान का भी आयोजन किया जा रहा है ।
इस क्रम में श्रावण शुक्ल प्रतिपदा को भव्य विवेचना के साथ स्नात्र महोत्सव तथा श्रावण सुदी तृतीया से श्रावण सुदी नवमी तक महान जैनाचार्य कविकुलकिरीट श्री लब्धिसूरी गुरूदेव की 64 वीं पुण्यतिथि प्रसंगे आठ दिवसीय श्री नेमि- लब्धि महोत्सव का आयोजन होगा।
जिसमें अंतर्गत विभिन्न पूजा, गुणानुवाद, उवसग्गहरं महापूजन, श्री नेम संयम अहोभाव, गिरनार भाव यात्रा जैसे हृदयस्पर्शी मांगलिक अनुष्ठान सम्पन्न होगा

