छाया श्रद्धा व भक्ति का रंग, तीर्थराज सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र की अनुपम झांकी से मुनियों ने दिया धर्मसंदेश…. मुनि अनुपम सागर,मुनि निर्मोह सागर ससंघ के सानिध्य में तीर्थराज सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र की अनुपम झांकी का लोकार्पण

छाया श्रद्धा व भक्ति का रंग, तीर्थराज सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र की अनुपम झांकी से मुनियों ने दिया धर्मसंदेश…. मुनि अनुपम सागर,मुनि निर्मोह सागर ससंघ के सानिध्य में तीर्थराज सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र की अनुपम झांकी का लोकार्पण

भीलवाड़ा(अमर छत्तीसगढ) 30 जुलाई। श्री महावीर दिगम्बर जैन सेवा समिति के तत्वावधान में शास्त्रीनगर हाउसिंग बोर्ड स्थित श्री सुपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में वर्ष 2025 का चातुर्मास कर रहे पट्टाचार्य आचार्य विशुद्धसागर म.सा. के शिष्य मुनि अनुपम सागर संसघ ने सोमवार को संयम भवन में मोक्ष सप्तमी महोत्सव के पहले दिन तीर्थराज सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र की अनुपम झांकी का लोाकर्पण करने के बाद वहां विराजित होकर धर्म संदेश प्रदान किया तो पूरा वातावरण श्रद्धा व भक्ति से ओतप्रोत हो गया।

मुनि अनुपम सागर महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में युग युगान्तर तक यहीं संदेश गुंजायमान हो रहा है कि जीवन में संस्कार ओर संगति का प्रभाव इंसान पर अवश्य पड़ता है।

आज भी प्रत्येक माता-पिता चाहते है कि उनके बच्चें हर तरह से महान बनकर उनका नाम रोशन करे लेकिन आज माता-पिता का गौरव कुसंस्कारों के कारण क्षीण होता जा रहा है।

उन्होंने मोक्ष सप्तमी महोत्सव महोत्सव के शुभ अवसर पर पार्श्वनाथ कथा के दो भाई मरूभूति ओर कमठ के प्रसंग का संगीतमय मार्मिक चित्रण कर सैकड़ो श्रावक-श्राविकाओं के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।

मुनिश्री ने कहा कि इस पंचम काल में हर परिवार में प्रभुत्व एवं वर्चस्व की लड़ाई चलती है। माता-पिता जन्मदाता के साथ जीवनदाता भी है इसके बावजूद उनके उपकार संतान भूलती जा रही है।

एक तरफ ममता ओर दूसरी तरफ निर्ममता के प्रतीक मरूभूति ओर कमठ के इस प्रसंग से हमे शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए। कुसंस्कार हमारी जिंदगी की गति बिगाड़ सकते है इसलिए हमेशा धर्म की संगत में रहे।

प्रवचन में मुनि निर्मोहसागर महाराज ने कहा कि अनावश्यक क्रियाकांडो में न पड़कर धर्म के मर्म को समझकर अपने व्यवहारिक जीवन में आमूलचूल परिवर्तन करना चाहिए।
श्री महावीर दिगम्बर जैन सेवा समिति के अध्यक्ष राकेश पाटनी ने बताया कि तीन दिवसीय मोक्ष सप्तमी महोत्सव के पहले दिन मुख्य शांतिधारा का लाभ श्रीमती मनोहरदेवी, विनोद कुमार, कमलेश, सोमेश, कमल, हितवी ठग परिवार को मिला।

सम्मेद शिखर की अनुपम झांकी का अनावरण जयकुमार नीलम,अमन, अर्पित छाबड़ा ने किया। सौधर्मेन्द्र अशोककुमार सुशीला छाबड़ा, धनपति कुबेर विजय उषा काला, ईशान नीरज मनीषा शाह, सनत दीपक नीरू अजमेरा, महेन्द्र सोमेश सुधा ठग, ब्रह्इन्द्र विनोदकुमार मंजू गोधा बने। जिनवाणी स्थापना रजनीश पाटनी ने की।

मीडिया प्रभारी भागचंद पाटनी ने बताया कि इनके अतिरिक्त अनेक सामान्य इन्द्र इन्द्राणियों ने कल्याण मंदिर विधान के 8 अर्धों का भक्ति भाव के साथ सम्मेद शिखर पर समर्पित किया। इसके बाद कल्याण मंदिर विधान पर सौधर्मेन्द्र एवं अन्य इन्द्रों ने 8 अर्ध समर्पित किए। शाम को गुरू भक्ति आरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इन कार्यक्रमों का संचालन पंडित आशुतोष शास्त्री एवं पदमचंद काला ने किया। सांयकालीन भव्य आरती का सौभाग्य अशोक कुमार सुशीला छाबड़ा को प्राप्त हुआ। कल्याण मंदिर विधान में सैकड़ों श्रावक पूजा में शामिल हुए। भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में 31 जुलाई को निर्वाण का लड्डू चढ़ाया जाएगा।

Chhattisgarh