रायपुर (अमर छत्तीसगढ़) 1 अगस्त। शासन दिपिका साध्वी मंजुला श्री जी हर भव्य आत्माओं को जागृत करते हुए धर्म सभा में कहा- हे भव्य उपासकों परमात्मा महावीर की जिनवाणी संदेश दे रही है। जो पांच इन्द्रियां और चार कषायों को जो जीत लेता है। सर्वज्ञ सर्वदर्शी परमात्मा बन जाते है।
हे भव्य उपासकों हमें चिन्तन करना है- हम पांच इन्द्रियों और चार कषायों पर कंट्रोल क्यों नहीं पा रहे हैं? हमारा मन इनसे बार-बार क्यों हार जाता है। पता नहीं हमने कितना जीवन एकन्द्रीय से लेकर पचेन्द्रीय तक हार मानकर 84 लाख योनियों में भटकते रहें।
हम संसार के परिभ्रमण में हार जीत में ही जिन्दगी को तबाह करने में लगे हैं? परमात्मा महावीर की जिनवाणी कह रही है- हमारी इन्द्रियाँ हमें हर कार्य का संकेत दे देती है नाक का काम हैं सूंघना वह सूंघ कर संकेत करती है किसे लेना किसे छोड़ना। ऐसे ही आंखे आदि ये सब ही हमारे जीवन को सफल बनाने के लिये परमात्मा की दी इस आत्मा के मूल्य को जानो समझो।
इन सबसे सीख कर नही सुधरे तो पूरे जीवन में भटकते रह जाओगे। जागो। परमात्मा महावीर कह रहे है हमारी आत्मा में अनंत अनंत सुख भरा है झरना बह रहा है। उसे देखो, समझो, जानो, बाहर के प्रदुषण वातावरण से इन्द्रियों को बचाओ नही तो उसके गुलाम बनकर मकड़ी के जाल में फंस जाओगे।
हे भव्य उपासकों आज के इसयुग में देश भारत को नरेन्द्र जी मोदी जी अपने विवेक से चला रहे है वे सभी का भला चाहते है। वे हर भारतवासी से कहते है जागो भारत की बनी चीज भारत की लो। हमारे सभी लोगों का भला होगा।
हमारे देश के लोग मेहनती व दिमाग वाले है जो अब भारत में हर चीज बना रहे है। विदेशी लोग भारत को गुलाम बनाने में लगे हैं? इनसे बचें। इनकी चीजों की पेकींग सुंदर होती है पर अन्दर में उस चीजो में ताकत नहीं। हमारे भारत की संस्कृति बहुत सुन्दर है यहां के लोग लगन व ईमानदारी से हर चीज अच्छी बनाते है।
इसी का फायदा उठाकर हमारे लोगों को विदेशी लोभ व आकर्षित कर नौकरी देते है? और उनका भरपूर फायदा उठाते है। हमें इन सब से बचना होगा नही तों हमारी इन्द्रियां इनके समानो के गुलाम लोभ में उलझ गई तो यह देश फिर गुलाम हो जायेगा। हमारे भारत देश में बहुत बड़ी ताकत है।
हम सब देशहित देखकर भारत का साथ दे। साथ देते रहे तो कोई भी देश धमकियों और अधिक टैक्स लेकर भारत को गुलाम नही बना सकता है, ठग सकता है। ये सब हमारे देश के अरिहंत परमात्मा, देवी-देवताओं और अनेक महापुरुषो ने हमें संकेत, ईशारा कर चूके है।
हम जागे और अपने जीवन को प्रेम करूणा, दया, मेत्री से जोड़कर आगे बढ़े यही हमें बार-बार परमात्मा महावीर की जिनवाणी हमें यही संदेश दे रही है।
हे भव्य उपासकों- धन्ना के पिताजी तीनों बेटों को बहुत समझाया पर वे जिद में अड़े रहे। ये बात सुन धन्ना ने कहा पिताजी भाई मान नहीं रहे है मुझे आप कहीं बाहर भेज दें। इन तीनो को शांति मिल जायेगी। क्लेश भी घर में नही होगा। पिताजी ने कहा धन्ना ठीक कह रहा है मैं इसे बाहर भेज देता हूं।
तीनो ने कहा ये कैसे हो सकता है हमें तो न्याय चाहिये आप हमारी तिसरी बार परीक्षा लें। पिताजी ने तीनों को 100-100 मासा सौनया दे दी और कमाकर लाओं।
कमाकर गांव में भोजन कराना और कमाई मुझे बताना। तीनो मार्केट में चले गये और कपड़ा मार्केट में अच्छा माल तीनो ने 100-100 मासा सौनया देकर खरीद लिया और एक जगह कपड़े की गठरी रखकरर वहां बैठ गये। बड़ा भाई ने देखा पास में मांग की दुकान है वह चल पड़ा और पीकर आया उसने दोनो भाई से कहा इस कपड़े की गठरी का ध्यान रखना। वह नशे में आकर वहां बैठ गया।
दूसरा भाई देखा ग्राहक आयेंगे तो थोड़ा घूम आता हूं वह दोनो भाई को बोलकर चला गया। रास्ते में सुन्दर नाटक चल रहा था वह उसी में रह गया। तीसरे भाई को लघुशंका आई वह बड़े भाई को देखना करके चला गया।
इधर चोर लोग की नजर कपड़े की गठरी पर पड़ी देखे भाई वह नशे में है वे सभी गठरी चोरी कर ले गये। इधर तीनों भाई ने देखा यहां कुछ नही है। पिताजी से सारी बात कही। पिताजी ने फिर भी तीनो को हिम्मत दी। पिताजी ने कहा अब शांति रखो। तीनो ने कहा नही हम देखते है धन्ना कैसे कमाकर लाता है यह हम आगे जानेंगे। क्रमशः

