जीवों के प्रति हिंसा बढ़ती जा रही है जिससे सारा संसार दुखी होता जा रहा- साध्वी मंजुला श्री

जीवों के प्रति हिंसा बढ़ती जा रही है जिससे सारा संसार दुखी होता जा रहा- साध्वी मंजुला श्री

रायपुर (अमर छत्तीसगढ) शासन दिपिका साध्वी मंजुला श्री जी आत्मा को जागृत करते हुए धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा- हे भव्य उपासकों परमात्मा महावीर ने केवल ज्ञान में देखा सारा संसार के समस्त प्राणी किसी न किसी रूप से दुखी है इसे जानकर उन्होने जगत (संसार) के समस्त प्राणियों की रक्षा के लिये अपनी करूणामयी दया से जगत को दिशा दी।

परमात्मा महावीर ने इसका प्रयोग अपने से ही शुरू किया संसार के समस्त प्राणियों (संसार, प्रकृति आदि) सभी को अभयदान देकर और कहा जियो और जीने दो। यह मंत्र सभी को सुखी बनाने का परमात्मा महावीर का महामंत्र है।

हे भव्य उपासकों- आज के कलयुग मे हम छः काया जीवों की रक्षा कितनी कर पा रहे है। जीवों के प्रति हिंसा बढ़ती जा रही है जिससे सारा संसार दुखी होता जा रहा है। परमात्मा महावीर का संदेश है जीव जितना ज्यादा अहिंसा का पालन करेगा सभी के प्रति दया भावना बनाए रखेगा वह सदा सुखी रहेगा।

इसके लिये अपने जीवन में जीव-अजीव का ज्ञान होना जरूरी है। जब उसे सम्यक् ज्ञान हो गया तो सही दिशा में बढ़ेगा।

हे भव्य उपासकों- एक व्यक्ति अपने जीवन से बड़ा दुखी था उसे एक साथी मिल गया उसने प्रेरणा दी तुम बकरे की बलि दो तो तुम्हें सारा सुख मिल जायेगा। उसने वही किया एक, दो, तीन के बाद भी वह सुखी नही हुआ। यह उसका अज्ञान था।

संयोग से उसे एक जैन संत मिल गये उस दुखी व्यक्ति की पूरी बात सुनी और उसे बताया। हमारे जैन धर्म में दया का बहुत बड़ा महत्व है। जो जीव को दया कर अभयदान देता है वह सारे सुख को प्राप्त कर लेता है। इस प्रकार वह संत के पास ज्ञानार्जन करने लगा। इससे जीवन शांत और खुशीमय हो गया।

संत ने कहा तुम आयंबील का तप कर लोगे तो कर्मों की निर्जरा होगी और तुम सदा के लिये सुखी बनते चले जाओगे उसने संत की बात मान ली और वह पूरा ज्ञानार्जन कर सामयिक तपस्या आदि सीखकर अपने जीवन को सुखी बना दिया।

हे भव्य उपासकों- धन्नाशाली भद्र लकड़ी के मार्केट में घूम रहा है। उधर सेठ पलंग में रत्न छूपाकर सो रहे है। कंजूस सेठ का उस पलंग से मोह नही छूट पा रहा था। वह रत्नों के चक्कर के मोह में लगा रहा और अपने बच्चों से कहा मैं जब मर जाऊ तो यह खाट मेरे साथ ही जला देना। संयोग से पिता की मृत्यु हो गई।

बच्चे खाट लेकर शमशान घाट ले गये और पलंग सहित पिता को जलाने की तैयारी करने लगे। इतने में शमशान घाट का रखवाला आया देखा बोला यहां खाट को नही मरे आदमी को जलाया जाता है बेटो ने वह खाट शमशान घाट वाले रखवाले को दे दिया।

वह घर से ले जाकर सोचा इसका घर में क्या करूंगा इसे लकड़ी मार्केट में ले जाकर बेच दूंगा। वह गया लोग मरे हुए की खाट नही खरीद रहे थे। धन्ना की नजर पड़ी उसे यह पसंद आया और 5 मासा में खरीद लिया और घर पलंग ले चल पड़ा इधर धन्ना के तीनो भाई यह सब देख आगे क्या होता है जानेंगे क्रमशः

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