रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 12 अगस्त। आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत मंगलवार को दादाबाड़ी में आयोजित प्रवचन में परम पूज्य हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने कहा कि बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में एक वृद्ध साधु रहा करते थे, जिनका मानना था कि इंसान के शुभ और अशुभ कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते—वे अपने समय पर अवश्य फल देते हैं। वह अक्सर कहते, “जैसा बीज बोओगे, वैसा ही फल पाओगे, चाहे आज हो या कई बरस बाद।”
नगर के लोग हमेशा धन के बारे में चिंतित रहते। जिनके पास धन नहीं था, वे दिन-रात उसे पाने के लिए मेहनत करते। और जिनके पास धन आ चुका था, वे उसके सुरक्षित रखने की चिंता में डूबे रहते। मानो धन ने सबके मन में एक अदृश्य बेड़ियां डाल दी हों। साधु कहा करते, “सच्चा संतोष सोने-चांदी से नहीं, हृदय की गहराई से आता है।”
लेकिन नगर में ऐसे लोग भी थे जो किसी भी तरह दूसरों का धन हड़पने का प्रयत्न करते। धन के लोभ ने कई बार भाइयों को आपस में लड़ाया और परिवारों को तोड़ दिया।
साधु के पास एक प्राचीन ग्रंथ था जिसमें लिखा था कि धन की महत्ता को नकारा नहीं जा सकता, परंतु यह केवल साधन है, लक्ष्य नहीं। ग्रंथ यह भी कहता था कि चाहे कोई कहानी कल्पना पर आधारित हो या किसी रूपक के रूप में कही गई हो, यदि उससे जीवन का सच्चा संदेश मिलता है, तो उसे अपनाना चाहिए।
साधु उन कथाओं को नगरवासियों को सुनाते, ताकि लोग समझ सकें कि धन का लोभ विनाश की जड़ है और संतोष ही सबसे बड़ा खजाना है। लोग जब उनकी बातें सुनते, तो कुछ क्षण के लिए उनकी चिंता दूर हो जाती—और शायद यही उस साधु की सबसे बड़ी कमाई थी।
ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली तथा आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने जानकारी दी कि दादाबाड़ी में प्रतिदिन सुबह 8:45 से 9:45 बजे तक साध्वीजी के प्रवचन का आयोजन भी हो रहा है। समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर जिनवाणी का लाभ लें।
पर्यूषण महापर्व 20 अगस्त से, विशेष नाट्य मंचनों का आयोजन
20 अगस्त से पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व की शुरुआत होगी। आठ दिवसीय इस पर्व के दौरान श्री धर्मनाथ जिनालय एवं दादाबाड़ी को सुगंधित फूलों और दिव्य आंगियों से सजाया जाएगा। भव्य कुमारपाल महाराजा की आरती, परमात्मा भक्ति तथा विविध भक्ति कार्यक्रम होंगे।
इस अवसर को और भी प्रभावशाली बनाने हेतु कामविजेता स्थुलीभद्रजी तथा शासनरत्न मोतीसा सेठ के जीवन पर आधारित प्रेरणादायी नाट्य मंचनों का आयोजन भी होगा।
समाज के धर्मानुरागियों से इन समस्त आयोजनों में सहभागी होकर आत्मकल्याण एवं धर्मसंपदा अर्जित करने का अनुरोध किया गया है।

