राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 14 अगस्त। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि मोबाइल चलाने के लिए तीन चीजों का होना जरूरी है पहला मोबाइल, दूसरा मोबाइल का चार्ज रहना,तीसरा उसमें सिम कार्ड होना जरुरी है।
इसी तरह इस जीवन को आत्म कल्याण के लिए मोबाइल अर्थात ज्ञानी, चार्ज अर्थात मन में स्वाध्याय करने की इच्छा और मोबाइल में सिम अर्थात एकाग्रता।
इन तीन चीजों के होने के बाद चौथी चीज का होना अर्थात मोबाइल चलाने की जानकारी का होना भी जरूरी है। इसी तरह आत्म कल्याण के लिए ज्ञानी से मिले ज्ञान के उपयोग की जानकारी भी होना भी जरूरी है।
जैन बगीचे के नए हाल में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में वीरभद ( विराग ) मुनि ने कहा कि कुछ पाने के लिए प्रतिदिन स्वाध्याय करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आप साधु के पास जाते हैं तो सिर्फ स्वाध्याय के लिए जाओ, किसी अन्य काम के लिए मत जाओ। इससे आपका और साधु का दोनों का ही कीमती समय बर्बाद नहीं होगा। स्वाध्याय को जीवन का जरूरी अंग बनाओ। स्वाध्याय करने वाला भीतर से मजबूत हो जाता है।
स्वाध्याय नियम, पचकान आदि में दृढ़ता दिलाता है। स्वाध्याय के समान कोई तप नहीं है। स्वाध्याय आत्मरमण का केंद्र होता है।
वीरभद ( विराग ) मुनि ने कहा कि प्रतिदिन एकासना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन असुरक्षित है, कभी भी खत्म हो सकता है।
एक बार इस शरीर से प्राण निकल जाए तो फिर उसे कोई वापस नहीं ला सकता। इसलिए स्वाध्याय के रास्ते आत्म कल्याण के मार्ग की ओर बढ़ना चाहिए। हमें धर्म पथ पर इतना बढ़ जाना चाहिए कि वह हमें मोक्ष की मार्ग की ओर ले जा सके।
जिसका स्वाध्याय में रूचि नहीं तो समझो मोक्ष से उसकी दुश्मनी है। इस जीवन में आए हो तो हंसी का पात्र मत बनो और स्वाध्याय कर आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ो। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

