पवित्र भोजन भीतर जाता है तो व्यक्ति में परिवर्तन अवश्य आता है…. किसी साथी को कमजोर पाते हैं तो उसकी मदद करें- मुनि वीरभद्र

पवित्र भोजन भीतर जाता है तो व्यक्ति में परिवर्तन अवश्य आता है…. किसी साथी को कमजोर पाते हैं तो उसकी मदद करें- मुनि वीरभद्र

राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 21अगस्त। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि संघ का महत्व तभी होता है जब आप अपने आपको गौण मानकर संघ में शामिल प्रत्येक साथी को महत्व दें।

अपने किसी साथी को यदि आप कमजोर पाते हैं तो आप उसकी मदद करें। भले ही वह आपका कर्जदार हो किंतु आप उस समय कर्ज को भूलकर उसे सांत्वना दें कि आपको यदि और सहयोग की जरूरत पड़े तो हम करेंगे।


जैन बगीचे के नए हाल में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में प्रख्यात जैन मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि यदि पवित्र भोजन भीतर जाता है तो व्यक्ति में परिवर्तन अवश्य आता है। किसी भी व्यक्ति को कमजोर ना समझे।

आप उदारता से उसका सहयोग करें ताकि वह आपकी तरह साधार्मिक भक्ति कर सके। पर्यूषण पर्व के दौरान जो भी आराधना होती है, तत्वों को समझकर आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ते जाएं। मुनि श्री ने कहा कि रथ यात्रा कभी विफल रही होती, बरघोड़ा कभी विफल नहीं होता।

हम कहीं ना कहीं उसकी वास्तविकता को समझ नहीं पाते। यह परमात्मा को आकर्षित करता है। बरघोड़ा निकालते समय कुछ ऐसा भी आयोजन करते जाएं कि लोग धर्म के प्रति प्रेरित हो।


जैन मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने फरमाया कि हर मौसम का अलग-अलग प्रभाव होता है। मौसम के अनुसार वस्तुओं का व आराधना का प्रभाव भी अलग-अलग होता है। उन्होंने कहा कि अपना विवेक जागृत होना चाहिए, कि किस फील्ड में मेरी जरूरत है और यह विवेक भी होना चाहिए कि मुझे करना क्या है?

धर्म के कार्यों में पैसा कभी पेंडिंग नहीं रखना चाहिए। धर्म के क्षेत्र में यदि अपना पैसा पेंडिंग होता है तो यह दुःखदाई होता है। अपने को अपने द्रव्य का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग करना चाहिए। गुरु के कार्य के लिए यदि कुछ करना पड़े तो भी वह करें। रोज परमात्मा के दर्शन और एक सामायिक अवश्य करें।


जैन मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहां की भगवान के घर देर है अंधेर नहीं। धर्म के काम में जितना लगाओगे उससे ज्यादा ही पाओगे। शासन के कार्यों का लाभ लेने का मौका ना छोड़ें। जिनवाणी श्रवण करने का कोई भी मौका न चूकें।

गुरु भगवंतो की हस्तलिखित पुस्तकों के संरक्षण का कार्य करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग, ज्यादा से ज्यादा समय तक लाभान्वित हो सके। उन्होंने कहा कि प्रवचन का छूटना यानी अनेक जरूरी चीजों का छूटना होता है। स्वाध्याय आदि से जुड़ें। जो बच्चे प्रतिक्रमण कर चुके हैं, उन्हें प्रोत्साहित करें।

शासन प्रभावना के जो-जो तरीके हो, वह करें। गलतियां कई बार होती है किंतु उसे छुपाएं नहीं बल्कि सामने वाले से अपनी गलतियों की माफी मांग ले। अपने पास बेहतर मौका है,

पर्यूषण पर्व के इन आठ दिनों में हम अपने पाप धो सकते हैं और अपनी गलतियों की क्षमा मांग कर आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ सकते हैं। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाज़रा ने दी।

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