तप त्याग,धर्म ध्यान, साधना आराधना एवम जप जाप में गहरे गोते लगा रहे हैं श्रावक श्राविकाएं…. उतराध्यन सूत्र जैन श्रद्धालुओंका प्रसिद्ध सूत्र है – जैनाचार्य श्री विजयराज

तप त्याग,धर्म ध्यान, साधना आराधना एवम जप जाप में गहरे गोते लगा रहे हैं श्रावक श्राविकाएं…. उतराध्यन सूत्र जैन श्रद्धालुओंका प्रसिद्ध सूत्र है – जैनाचार्य श्री विजयराज

जयपुर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 22 अगस्त।
(प्रकाश जैन)

गूंजी गुरु जिनवाणी..श्रावक श्राविकाओं ने लगाई गहरी डुबकियां जिन वाणी में….
गुलाबी नगरी जयपुर के तिलक नगर के सूर्य मार्ग स्थित सामुदायिक भवन प्रवचन मंडपम् में चातुर्मास के 44 वें दिन गुरुवार को प्रवचन में जैन जगत की दिव्य विभूति जैनाचार्य श्री विजयराज म.सा. की मंगलाचरण की गूंज के बाद अपनी दिव्य देशना में कहा कि भगवान महावीर ने उत्तराध्ययन सूत्र की महत्वत्ता प्रतिपादित करते हुए कहा कि इसके 36 अध्ययनों में अलग-अलग विषयों का वर्णन किया गया है। यह जैन धर्मावलियों का प्रसिद्ध सूत्र है। अगर वे इसे जीवन में ढाल लें तो संसार के परिभ्रमण से मुक्त हो सकते हैं।
गुरु भगवन के मुखारविंद उतराध्ययन का श्रवण कर श्रद्धालु हुए अभिभूत एवम पुलकित…
प्रवचन प्रभाकर जैनाचार्य प्रवर श्री विजयराज जी म.सा. उत्तराध्ययन सूत्र के 31 वें अध्ययन में चरण विधि का उपदेश दिया है। इस अध्ययन की चौथी गाथा में तीन दण्डों का जो त्याग कर लेता है, वह सांसारिक जीव परिभ्रमण नहीं करता है और संसार से मुक्त हो जाता है। इसलिए तीन दण्ड, तीन शल्य और तीन गारव (गर्व) का त्याग करो।
साता शरीर से, शांति मन से….
जैनाचार्य भगवन श्री ने कहा कि साता शरीर से और शांति मन से संबंध रखती है। यह धुरी है, जिसमें सांसारिक लोग घुमते रहते हैं। सभी छोटे से बड़े स्तर के लोग इसी धुरी पर घुम रहे हैं। सांसारिक जीवों की हमेशा चाहत बनी रहती है कि वे साता और शांति में बने रहे।

इसके लिए वे एडी से चोटी तक पसीना बहाते हैं। पर यह पुण्य के उदय पर ही निर्भर है कि वह उन्हें मिल पाती है या नहीं। बिना पुण्य के ना तो साता और ना ही शांति मिल पाती है। वहीं प्रसन्नता आत्मा से ही प्राप्त की जा सकती है।

संतों के हिस्से में प्रसन्नता ही आत्म बल से मिली हुई है। केवल धर्म ही आत्म बल दे सकता है। इसलिए तन को धर्म में लगाओ और मन धर्म में रमाओ, तो आत्म बल मिल सकेगा। अगर धर्म की अनुकूलता में जाओगे तो प्रसन्नता नहीं मिलेगी।

इसकी प्रतिकूलता में जाकर ही प्रसन्नता मिल सकेगी। साधकों में धर्म की प्रतिकूलता के कारण ही आत्मा की प्रसन्नता रहती है, जबकि इसके विपरित संसारी जीवों में धर्म की अनुकूलता के कारण यह संभव नहीं हो पाती है। उन्होंने कहा कि जीवन में अगर कुछ करना है तो मन के मारे मत बैठो।
दुःख की फरियाद किसी से मत करो, दुःख को भुलाने का प्रयास करो- श्री विजय गुरुदेव
जैन जगत की दिव्य विभूति जैनाचार्य प्रवर श्री ने कहा कि दुख की फरियाद किसी से मत करो। अगर इससे मुक्त होना है तो फरियाद व स्मृति ना करें। इसकी एक मात्र दवा है दुख को भुला देना।

इस संदर्भ को लेकर उन्होंने भगवान महावीर का जिक्र करते हुए कहा कि इन्होंने दो चतुर्मास अनार्य देशों में व्यतित किए, काफी कष्ट सहे। पर वे अपने कर्म पर अडिग रहे, इसलिए वे आज पूजनीय हैं।

सभी सांसारिक जीवों को उनकी जय बोलने से पहले उनके आचरण को आत्मसात करने की जरूरत है। संतों के चरण मत पकड़ो बल्कि उनके आचरण को पकड़ो, तभी दोष और दुख मुक्त हो सकोगे।


मानव धर्म ज्ञान को बढ़ाने का भव्य पुरुषार्थ करें…
प्रवचन प्रभाकर श्री विजय गुरुदेव ने कहा कि आज हर व्यक्ति में किसी ना किसी तरह का रोग मिलेगा ही, पुण्य जब करवट बदलता है तो बार-बार अस्पताल जाना पड़ता है।

डॉ.दवा बदल-बदल कर देकर ठीक होने का आश्वासन देता रहता है। इसलिए थोड़ा-सा धर्म ज्ञान बढ़ा लो, विश्वास और श्रद्धा ही ठीक करेगी। फिर किसी दवा की जरूरत नहीं है।
तन की साता का गर्व कभी नही करना चाहिए…
नानेश पट्टधर जैनाचार्य श्री विजय गुरु भगवन ने कहा कि आत्मा की प्रसन्नता के लिए तन की साता का गर्व मत करो। साधु-साध्वी छह काया के जीवों का सहयोग लेता है, उनका वे उपकार व आभार मानते हैं। अगर विनम्रता रहेगी तो आत्मा में भी प्रसन्नता रहेगी।


जीवन में कुछ करना है मन को मारे मत बैठो…
गुरु भगवन् प्रवचन का आगाज भजन जीवन में कुछ करना है, तो मन को मारे ना बैठो… आगे आगे बढऩा है, तो हिम्मत हारे ना बैठो… चलने वाला मंजिल पाता… बैठा पीछे रहता है…ढेरा पानी संडने लगता है, बहता पानी निर्मल रहता…भजन सुनाकर प्रवचन मंडपम् को भक्तिमय बना दिया।

इस भजन का श्रद्धालुओं ने पूरी तन्मयता से श्रवण कर भक्ति रस में गहरे गोते लगाए। श्री विजय गुरु के साथ श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं ने इस भजन को गाते हुए समूचे क्षेत्र को गूंजा दिया।धर्म सभा को विद्वान संत श्री विनोद मुनि म.सा. ने भगवान महावीर द्वारा दिए गए उपदेश, पर्युषण पर्व और जैन दर्शन के विभिन्न आयामों की मार्मिक विवेचना की।


श्री विजय गुरु की धर्म देशना पर आधारित प्रश्न मंच श्रंखला में जबाव देने की लगी होड़….
परम विदूषी महासती पद्म श्री ने भी पर्युषण पर्व की महत्वत्ता पर जानकारी दी। विदूषी महासती श्री नेहा श्री जी म.सा. ने प्रवचन से संबंधित सवालों के जवाब श्रद्धालुओ से पूछे इस प्रश्न मंच में श्रावक श्राविकाओं में जबाब देने की जोरदार होड़ देखी गईं।विजेता प्रतिभागियों को संघ की और से सम्मानित किया गया।
तप से कुंदन बनाने में जुटी नन्ही श्राविका तन्वी नन्हे श्रावक यश, हुए प्रत्याख्यान
प्रत्याख्यानों की श्रृंखला में अन्य बियासन, एकासना, आयम्बिल, नीवीं, उपवास, बेले, तेलें, आदि प्रत्याख्यानों के साथ नन्ही श्राविका तन्वी ढाबरिया पुत्री हनुवंत, नीतू ढाबरिया के 11वां का पुर है और यश का 7 वां उपवास गतिमान है। एकासना, आयम्बिल, उपवास और तेले की लड़ी भी निरंतर जारी है। श्रावक श्राविकाओं सहित चारित्र आत्माओं की अन्य गुप्त तपस्याएं भी जारी है।


देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालुओं का गुरु सेवा में आने का सिलसिला जारी…
संघ के सेवा समर्पित महामंत्री नवीन लोढ़ा ने जानकारी दी कि पर्युषण पर्व पर सामूहिक तेले चल रहे हैं। शेयर प्रतियोगिता 7 सितंबर को होगी। उन्होंने देश के विभिन्न भागों से आए हुए मेहमानों तथा सभा में उपस्थित श्रावक श्राविकाओं का आभार प्रकट किया।

श्री विजय गुरु के दिव्य दर्शनों एवम जिन वाणी का लाभ लेने हेतु देश-भर से भारी तादाद में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला सतत बना हुआ है।

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