पुष्कर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 23 अगस्त ।
(प्रकाश जैन,वरिष्ठ पत्रकार)
श्री मरुधर केसरी रूप सुकन चातुर्मास समिति एवं श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में श्री मरुधर केसरी पारमार्थिक संस्थान के सुधर्मा सभा में आयोजित महापर्व पर्युषण के चतुर्थ दिन में धर्म सभा में जैन श्रमण संघ के प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने कहा कि गुणियों के प्रति सात्विक हर्ष प्रकट करना प्रमोद भाव है।
सात्विक हर्ष का अभिप्राय है निष्काम खुशी । जिस हर्ष में स्वार्थ के कीटाणु हों, वह निष्काम भी नहीं होता और सात्विक भी नहीं होता।

किसी साधु-संत का गुणानुवाद कोई व्यक्ति इस भावना से करे कि उसे द्रव्य, धन, यश आदि की प्राप्ति हो सकती है अथवा अन्य लोग उसे धार्मिक और भक्त समझें तो इस भावना के मूल में रहते हुए जो हर्ष उसे होगा, वह सात्विक नहीं कहलायेगा । प्रमोद एक भावना है, इसका उद्गम स्थल हृदय है।
जब इस भावना से प्राणी भावित होता है तो उसका सम्पूर्ण शरीर आल्हादित हो जाता है, रोम-राजि खड़ी हो जाती है, वाणी गद्गद हो जाती है, चेहरे पर प्रफुल्लता के भाव प्रगट हो जाते हैं और हर्षाश्रु आँखों से उमड़ पड़ते हैं।
तो इस प्रकार यह एक हार्दिक और दूसरे शब्दों में मानसिक संवेग है । संयमी साधुओं के गुणों का विचार एवं अनुचिन्तन करके उनके गुणों के प्रति हर्ष और आल्हाद होना प्रमोद (मुदिता) भावना है।
गुणों को देखोगे तो गुण ही आयेंगे – अमृत मुनि
उपप्रवर्तक अमृत मुनि महाराज नेअपनी धर्म देशना में कहा कि संयमी साधुओं में विनम्रता, वैराग्य, अभय, निरभिमानता, रोष-दोषरहितता और निर्लोभता आदि गुण रहते हैं। साधुओं के इन गुणों के चिन्तन से चित में आल्हाद होता ही है, साथ ही गुण ग्रहण की भावना भी उत्पन्न होती है।

व्यक्ति स्वयं गुणी बनने का भव्य पुरुषार्थ करें= तपस्विराज
श्रमण संघ के उप प्रवर्तक तपोमूर्ति,दिव्य साधक संत श्री ने कहा कि मानव स्वयं गुणी बनता है उसके चित्त का हर्ष अनेकगुना हो जाता है। खुशी से दिल नाचने लगता है।
प्रमोद का घातक दोष है-पर-दोष-दर्शन की प्रवृत्ति, छिद्रान्वेषी होना । जो व्यक्ति दूसरों के दोष देखता है, वह व्यर्थ ही उसके प्रति अपने मन में विरोध भाव पाल लेता है। विरोध बढ़ते-बढ़ते रोष और क्रोध में बदल जाता है और यदि क्रोध अधिक दिन तक चलता रहा तो ईर्ष्या में परिवर्तित हो जाता है और आप जानते ही हैं कि ईर्ष्यालु व्यक्ति की सुख-शान्ति भंग हो जाती है, वह एक प्रकार की धीमी किन्तु अनबुझ आग में जलता ही रहता है।
फिर उसमें प्रमोद भाव का संचार कैसे हो सकता है ? जिस मनुष्य की छिद्रान्वेषण की आदत पड़ जाती है, वह हर वस्तु का अंधेरा पक्ष ही देखता है। उसे गुण नहीं, अवगुण ही दिखाई देते हैं ।

इंसान दोष दृष्टि से जीवन के अनमोल समय को खो रहा है= महेश मुनि
इस मौके पर संत महेश मुनि म.सा. ने कहा कि किसी की नम्रता को वह धोखेबाजी की भूमिका समझता है, तो सच्ची और निष्पक्ष सलाह को ठगी का जाल । दोषदृष्टि के कारण वह अपने अमूल्य समय को यों ही नष्ट कर डालता है।

भव्य आत्माओं के वर्णन श्रवण कर श्रद्धालु हुए अभिभूत
इस अवसर पर डॉ वरुण मुनि ने अंतगड़ सूत्र के चतुर्थ वर्ग में वर्णित भव्य आत्माओं की धर्म कथा का मार्मिक श्रवण करवाया।
डॉ वरूण मुनि के मुखारविंद से भव्य आत्माओं के वर्णन को सुनकर श्रद्धालु श्रावक श्राविकाएं अभिभूत एवम पुलकित हुए। संत संत अखिलेश मुनि जी ने कल्प सूत्र के माध्यम से भगवान महावीर जन्म कल्याणक प्रसंग का विवेचन किया।
श्रद्धालुओं का ब्रह्मा नगरी में गुरु दर्शनों हेतु लगा तांता,गुरु भक्ति में रंगे श्रद्धालु
पर्युषण महापर्व में संत मुनिराजों के समागम में नगर सहित प्रदेश व देश के विभिन्न हिस्सों से भारी संख्या में श्रद्धालु श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने अहिंसा के अवतार भगवान महावीर, मरुधर केसरी मिश्रीमल जी महाराज एवं लोकमान्य संत रूपचंद जी महाराज की जय जयकारों से समूचा क्षेत्र को गुंजायमान कर अपनी श्रद्धा भक्ति का परिचय दिया।
जैन समाज के लब्ध प्रतिष्ठित वरिष्ठ श्रावक एवम श्राविकाओं ने जैन जगत की दिव्य विभूति पूज्य मरुधर केसरी गुरु भगवन के जीवन दर्शन के गुणगान
कर खूब अभिभूत एवम प्रफुल्लित दिखाई दिए। मरुधर केसरी गुरु भक्ति में परम गुरु भक्तों ने गहरे गोते लगाए।

भगवान महावीर जन्म नाटिका का होगा भव्य आयोजन
श्री पुष्कर जैन महिला मंडल के नेतृत्व रविवार दोपहर को भगवान महावीर के कल्प सूत्र में वर्णित जन्म वाचन प्रसंग पुष्कर की जैन महिलाएं नाटिका के माध्यम से प्रस्तुति देंगी साथ ही इसमें 14 स्वप्न, त्रिशला माता की मातृत्व भावना तथा नामकरण महोत्सव मनाया जाएगा।


