तप करने वाले का शरीर औषधीय गुणों से भरपूर हो जाता है- मुनि वीरभद्र

तप करने वाले का शरीर औषधीय गुणों से भरपूर हो जाता है- मुनि वीरभद्र

00काया का मोह छोड़े बिना आत्म कल्याण संभव ही नहीं है

00चातुर्मासिक प्रवचन

राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 1 सितम्बर। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां तप की महत्ता बताते हुए कहा कि तप करने वाला व्यक्ति न केवल आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ता है बल्कि उसका शरीर औषधीय गुणों से भरपूर हो जाता है, उसकी शक्ति इतनी बढ़ जाती है कि वह व्यक्ति के शरीर का जहर तक उतार सकता है। तप करने से आत्मा का शोधन होता है और वह आत्म कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ जाता है।
जैन बगीचे स्थित उपाश्रय भवन में मुनि श्री वीरभद्र ( विराग )जी ने कहा कि तप करते समय तल्लीनता होनी चाहिए। जितनी भी प्रतिकूल स्थिति आ जाए व्यक्ति को सामान्य रहना चाहिए।तप करते समय ध्यान नहीं भटकना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तप करना कोई सामान्य बात नहीं है। तप करने वाला आत्मीय गुणों के अंदर रमण करता है। यदि हम आत्मरमण करते रहे तो हमारे गुणों का भी विकास होगा और हम आत्म कल्याण के मार्ग की ओर कदम बढ़ा लेंगे।
मुनि श्री वीरभद्र ( विराग )जी ने कहा कि पांच सामायिक एक साथ करने की कोशिश करें। साथ ही स्वाध्याय भी करने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय से बड़ा कोई तप नहीं है।

सद्गुरु के प्रति हमारा अनकंडीशनल समर्पण होना चाहिए तभी हम आत्म कल्याण का सही मार्ग चुन पाएंगे। मुनि श्री ने कहा कि अपने को पहचानने की कोशिश करो। काया का मोह छोड़े बिना आत्म कल्याण संभव ही नहीं है। उन्होंने कहा कि तप को सफल बनाना है तो त्याग करना सीखना ही होगा।

उन्होंने कहा कि हर रोज कम से कम एक सामायिक और स्वाध्याय जरूर करना चाहिए।मोबाइल को अपने से दूर रखें। कोशिश करें कि हर रोज कम से कम एक निश्चित समय तक अपने से मोबाइल को दूर रखें।

उन्होंने कहा कि तप करने के कई तरीके हैं किन्तु सफलता का रास्ता एक ही है तल्लीनता। प्रतिकूल परिस्थिति में भी एकाग्र रहना और साधना करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

00सिद्धि तप पारणोंत्सव शुरू

सकल जैन श्री संघ के अध्यक्ष मनोज बैद, चातुर्मास समिति के संयोजक प्रदीप गोलछा, सहसंयोजक पीयूष बैद, कोषाध्यक्ष सुरेश गांधी, सचिव प्रभात पारख ने बताया कि सिद्धि तप पारणोंत्सव का तीन दिवसीय आयोजन आज 1 सितंबर से शुरू हुआ। पहले दिन प्रातः 8:45 बजे से ” तप का महत्व”विषय पर प्रवचन हुआ एवं दोपहर 2:30 बजे से मेंहदी एवं सांझी पर कार्यक्रम नीपा शाह व जिया शाह, सूरत द्वारा तथा शाम 7:30 बजे से जैन बगीचा प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थानीय संस्थाओं / मंडलियों द्वारा प्रस्तुत किया गया।
मैंने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन 2 सितंबर मंगलवार को प्रवचन सुबह 8:45 बजे से होगा। तपस्या गीत दोपहर 1:30 बजे से,सिद्धि तप वधामना, संवेदना शासन भाई, मुंबई द्वारा साथी संगीतकार गौतम भाई वारिया, मुंबई के साथ शाम 7:30 बजे से प्रस्तुत किया जाएगा। तीसरे दिन 3 सितंबर बुधवार को परमात्मा संग तपस्वियों का भव्य बरगोडा प्रातः 7:30 बजे जैन बगीचे से निकलेगा और नगर भ्रमण करता हुआ वापस जैन बगीचे पहुंचेगा। इसके बाद सिद्धि तप के तपस्वियों का प्रातः 9:30 बजे से अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया है। उन्होंने सभी कार्यक्रमों में समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थिति का निवेदन किया है।

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