पर्यूषण पर्व के छठे दिन मना सुगंध दशमी पर्व जैन समाज की महिलाओं ने सुहाग दशमी व्रत कर जिनेन्द्र प्रभु की आराधना की

पर्यूषण पर्व के छठे दिन मना सुगंध दशमी पर्व जैन समाज की महिलाओं ने सुहाग दशमी व्रत कर जिनेन्द्र प्रभु की आराधना की

रायपुर (अमर छत्तीसगढ) 2 सितंबर।

पर्यूषण पर्व के छठे दिन सुगंध दशमी का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। साथ ही उत्तम संयम धर्म की विशेष पूजा अर्चना कर अष्टकर्मो के नाश को हवन कुंड में आहुति दी गई।
राजधानी रायपुर के श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में पर्यूषण महापर्व के छठे दिन सुगंध दशमी के पर्व पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। बड़ा मंदिर जी में अष्टकर्मो के नाश को हवन कुंड में निर्वाण कांड पढ़ आहुति दी।

इस दौरान दशलक्षण पर्व का छठा दिन उत्सव संयम धर्म अपनी इंद्रियों को वश में कर संयम से रहने की सीख देता है। संयम से जीवन व्यतीत करने वाला प्राणी सुखी रहता है।

सुगंध दशमी का शाब्दिक अर्थ है ‘सुगंधित दशमी’। ‘सुगंध’ का अर्थ है अपने सद्कर्मों से फैलने वाली आध्यात्मिक सुगंध, जबकि ‘धूप’ कर्मों के नाश का प्रतीक है। सुगंध दशमी आत्मशुद्धि और तपस्या का पर्व है।

आज दिगंबर जैन समाज की महिलाओं ने आज सुहाग दशमी व्रत का पर्व मनाया। महिलाओं ने उपवास रखकर मंदिरों में जिनेंद्र प्रभु के समक्ष विशेष पूजा अर्चना भी की। समाज की पूर्व महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती आराधना नायक जैन ने बताया कि जैन धर्म में सुहाग दशमी का विशेष महत्व है।

“सुहाग दशमी का उपवास स्त्री द्वारा अपने पति की लंबी आयु और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। यह व्रत आत्मशुद्धि का माध्यम भी है।”

पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण भक्तिमय बना रहा। मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया था और महिलाओं की उपस्थिति ने आयोजन को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया।

धार्मिकता और सामाजिक एकजुटता की मिसाल इस पर्व के माध्यम से समाज की महिलाओं ने धार्मिक अनुशासन, सद्भावना, और आध्यात्मिक बल का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

उपस्थित महिलाओं ने एक दूसरे को सुहाग की सामग्री का वितरण भी किया। आज के कार्यकम में विशेष रूप से समाज की महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती सरिता जैन एवं महिला की सदस्य महिलाएं उपस्थित थी।

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