राजनांदगांव (अमर छत्तीसगढ) 6 सितम्बर। प्रख्यात जैन संत श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य श्री वीरभद्र (विराग )जी ने आज यहां कहा कि आप इतिहास में गुम हो जाओ इससे पहले अपना इतिहास लिख लो।
उन्होंने कहा कि आपके वंशज आपको याद रखेंगे कि नहीं, कुछ कहा नहीं जा सकता क्योंकि आजकल घर की दीवारों में भी तस्वीर टांगने के लिए खूंटी नहीं होती, ऐसे में कब तक आप अपने परिवार वालों की याद में रहोगे। इसलिए कुछ ऐसा कर जाओ कि परिवार वाले ही नहीं पूरी दुनिया आपको याद रखें।
जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में आज मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि जब तक रुचि नहीं बनेगी तब तक जिज्ञासा उत्पन्न नहीं होगा और जिज्ञासा उत्पन्न नहीं होगा तो पुरुषार्थ भी नहीं होगा। हमें अंदर से जागृति चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रावक के घर का द्वार कभी बंद नहीं होना चाहिए, पता नहीं कब कौन पवित्र आत्मा द्वार पर आकर खड़ी हो जाए। उन्होंने कहा कि हमें तत्वों की भी समझ होनी चाहिए। यदि तत्वों की समझ आ जाये तो हमें आत्मा की लाभकारी और अलाभकारी स्थिति का ज्ञान हो जाएगा।
हमें तत्वों का ज्ञान न होने की वजह से हम यह समझ नहीं पाते कि हमारी आत्मा के लिए कौन सी चीज फायदेमंद है और कौन सी चीज नुकसानदायक है।
मुनि श्री वीरभद्र ( विराग )जी ने कहा कि अनेक लोगों को तत्वज्ञान होने के बावजूद उस पर भरोसा नहीं है।
जीव और पुद्गल एक दूसरे के बिना रह नहीं सकते। हमें दवा की जरूरत होती है लेकिन हम स्टोर ला खड़ा करते हैं। व्यक्ति कहीं ना कहीं बाहरी चीज पर भरोसा करता है। जीव को अंदर भी झांककर देख लेना चाहिए।
आपने अंदर झांककर देख लिया तो आपको अपनी कमियां भी नजर आ जाएगी। आप इन कमियों को दूरकर आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ जाएं। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी ।

