राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 10 सितंबर। प्रख्यात जैन संत श्री विनय कुशल मुनि जी के सुशिष्य एवं 171 दिन उपवास रखकर रिकॉर्ड बनाने वाले मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने आज मुनि श्री जयानंद जी की गुणानुवाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुनि श्री जयानंद जी के लिए भगवान की आज्ञा और गुरु की भक्ति उनके लिए महत्वपूर्ण थी। उन्होंने हमेशा शेर जैसा जीवन जिया है।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि जयानंद जी मसा. का व्यक्तित्व अद्भुत था, वे अपने साथ इतना ही समान रखते थे जितना कि उनको जरूरत होती थी। उन्होंने अपना जीवन नियम पालन करते हुए जिया। मुनि श्री ने बताया कि एक बार उनकी चर्चा रात्रि 8:00 बजे से सुबह 4:00 बजे तक चली। इस दौरान उन्होंने उनके समक्ष अपनी भाव आलोचना भी की। उन्हें गुरुदेव से बहुत कुछ सीखने को मिला।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि मशीन का एक पूर्जा टूटने से मशीन खड़ी हो जाती है, ठीक इसी तरह शरीर भी है। पता नहीं इसका कौन सा पूर्जा कब टूट जाए और हम खड़े हो जाएं। इसलिए इस शरीर का उपयोग कर लो और आराधना कर जीवन को सुधार लो। उन्होंने कहा कि मुनि जयानन्द जी महाराज चारित्र पालन में काफी मजबूत थे। उन्होंने कहा कि वे जीवन में जो कुछ बने हैं सब मुनिश्री की देन है। सकल जैन श्री संघ के अध्यक्ष एवं पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट समिति के मैनेजिंग ट्रस्टी मनोज बैद ने श्रावकों से खचाखच भरे हाल में मुनि श्री जयानंद जी महाराज को अपनी भावांजलि अर्पित की और कहा कि महाराज जी भगवान की आज्ञा का पालन करने वाले सच्चे पथ प्रदर्शक थे। यह जानकारी एक विज्ञप्ति मैं विमल हाजरा ने दी।

