चमत्कार तभी होता है जब जीवन में चारित्र हो- विनय कुशल मुनि

चमत्कार तभी होता है जब जीवन में चारित्र हो- विनय कुशल मुनि

राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 11 सितंबर। प्रख्यात जैन संत श्री विनय कुशल मुनि जी ने आज मुनि श्री जयानंद जी की गुणानुवाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुनि श्री जयानंद जी का जीवन चमत्कारों से भरा रहा। उनके भीतर अपार भक्ति थी।

10 सितंबर की रात को 12:00 बजे के बाद उन्होंने यहां से प्रस्थान किया।उनके लिए भगवान की आज्ञा और भक्ति महत्व रखती थी। उन्होंने कहा चमत्कार तभी होता है जब जीवन में चारित्र हो।


जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में आज मुनि श्री जयानंद जी की गुणानुवाद सभा को संबोधित करते हुए श्री विनय कुशल मुनि जी ने कहा कि गुरु भगवन के 95 महोत्सव में उन्होंने स्वयं अपनी आंखों से चमत्कार देखा है।

गुरु भगवन जिस जगह खड़े थे उस जगह उनके पैरों के निशान बन गए थे। तीन दिन बाद जब सफाई हुई, तब भी उनके पैरों के निशान वैसे के वैसे ही रहे। उन्होंने कहा कि गुरुदेव जब भक्ति करते थे तो परमात्मा के साथ एकाकार हो जाते थे, उनकी परमात्मा से लौ लग जाती थी।

उनका जीवन चमत्कारों और नियमों से भरा था। उन्होंने कहा कि ऐसे गुरु भगवन के समान ही हमारा चारित्र हो और उनका आशीष सदैव हम पर बना रहे। गुरु कृपा से हम मोक्ष के मार्ग की ओर आगे बढ़ जाएं।


भानपुरा ( मध्य प्रदेश) से आए एक श्रावक ने कहा कि गुरुदेव जयानंद मुनि जी का आशीर्वाद एवं सानिध्य भानपुरा ( मध्य प्रदेश) के लोगों को सदैव मिला है।

जैन समाज के 50 घर के 200 लोगों वाली इस बस्ती में गुरुदेव का चातुर्मास हो चुका है और उस दौरान भानपुरा ( मध्य प्रदेश) के लोगों को लगता था कि गुरुदेव जयानंद मुनि हमारे बीच के ही हैं और भानपुरा ( मध्य प्रदेश) में रहते हुए ही उन्होंने दीक्षा ली है।


श्री पार्श्वनाथ मंदिर समिति के मैनेजिंग ट्रस्टी एवं सकल जैन श्री संघ के अध्यक्ष मनोज बैद ने भी राजनांदगांव श्री संघ पर मुनि श्री का आशीर्वाद बना रहे, की कामना करते हुए बताया कि 11 सितंबर से दादाबाड़ी में 15 दिवसीय इक्तीसा का कार्यक्रम शुरू हो गया है। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

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