राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 12 सितंबर। कान्यकुब्ज सभा राजनांदगांव एवं नांदगांव साहित्य एवं संस्कृति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में डॉक्टर बलदेव प्रसाद मिश्रा की 127वीं जयंती त्रिवेणी परिसर में पुष्पांजलि कार्यक्रम के रूप में आयोजित की गई।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महापौर राजनांदगॉव ने साहित्य मनीषी डॉक्टर मिश्र जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके साहित्यिक योगदान को स्मरण किया गया।
आयोजन में महापौर मधुसूदन यादव, दिग्विजय कॉलेज के प्रोफेसर एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ शंकरमुनि राय, कान्यकुब्ज सभा के अध्यक्ष एवं डॉ मिश्र के पौत्र प्रदीप मिश्रा (सेवानिवृत्ति डीएसपी) सहित गणमान्य नागरिकगण के रूप में साहित्यकार पपु बक्शी जी के नाती अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव, वार्ड पार्षद राजा माखीजा, वरिष्ठ पार्षद संतोष पिल्ले, अखिलेश तिवारी अध्यक्ष नांदगांव साहित्य एवं संस्कृति परिषद, डी सी जैन अध्यक्ष शिवनाथ तट क्षेत्रीय विकास समिति राजनांदगॉव, कान्यकुब्ज सभा राजनांदगॉव के संरक्षक प्रोफेसर आरपी दीक्षित, सचिव अजय शुक्ला, कोषाध्यक्ष कृष्णकांत तिवारी, वीडी तिवारी, शैलेन्द्र शुक्ला, सुशील तिवारी, विवेक शुक्ला, जगदीश प्रसाद मिश्रा ,संजीव (संजू) मिश्रा, राकेश मिश्रा, भूपेंद्र बाजपेई, मनीष मिश्रा, शिवम शुक्ला, धीरज द्विवेदी, अखिलेश मिश्रा, दुर्गेश त्रिवेदी, प्रकाश वाधवानी एवं अन्य वार्डवासीगण सहित कॉलेज के छात्र-छात्राएॅ उपस्थित रहे ।
इससे पहले महापौर ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि पूज्य डॉक्टर मिश्र का साहित्य जगत में बड़ा योगदान रहा है, उनके कारण राजनांदगॉव को साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान मिली और राजनांदगॉव के रूप में जाना जाता है। प्रोफेसर शंकरमुनि राय ने अपने उद्गार में कहा कि डॉ बलदेव प्रसाद मिश्र राम काव्य परम्परा के सबसे बड़े रचनाकार रहे हैं, ऐसे देवतुल्य साहित्यकारों को नमन हैं।

