राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 12 सितंबर।श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि मौत जब करीब आती तो सारे पुरुषार्थ जाग जाते हैं। लंगड़ा दौड़ने लगता है और निर्बल के शरीर में बल आ जाता है फिर भी आत्मा को ताकतवर बनाने कोई प्रयास नहीं होता। एक न एक दिन मौत तो आनी ही है किंतु मरने से पहले हमने अपनी आत्मा को ताकतवर बनाने के लिए क्या किया?
जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि सब कुछ दिख रहा है किंतु आराधना किस लक्ष्य से करें, यह तय नहीं है। हम लोगों को लुभाने के लिए क्रियाएं करते हैं, इससे आत्मा तृप्त नहीं होती, आत्मा को इन क्रियाओं से कोई फायदा नहीं है। मुनि श्री ने कहा कि हम यहां स्थाई तौर पर रहने के लिए नहीं आए हैं। हर पल मौत हमारे करीब आती जा रही है, आखिर इस दौरान हमने आत्मा को जगाने के लिए क्या किया?
मुनि श्री वीरभद्र(विराग) जी ने कहा कि आत्मा की शक्ति अजब गजब है। यह जाग जाए तो काफी ताकतवर हो जाएगी। इसे कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि क्रियाएं निषेध नहीं है। क्रियाओं के माध्यम से हमें आत्मा की परिणीति को लेबल में लाना है।
लक्ष्य डिसाइड नहीं है तो आत्मा को कैसे जागृत कर पाएंगे? लक्ष्य निर्धारित करें और आत्मा की जागृति का प्रयास करें व आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ें। कौन-कौन से गुणों को मैंने प्राप्त किया, आत्म चिंतन करें तभी आत्मा जागृत हो सकती है।
हम अनंत काल से मोह की जकड़ में हैं, इससे छूटना जरूरी है तभी हम आत्मा को साधने का प्रयास कर पायेंगे। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

