राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 21 सितंबर।श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि कितनी भी इच्छाएं रख ले लेकिन होगा वही जो कर्म सत्ता चाहेगी। कर्मो के आधार पर ही परिणाम प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि हमारे कर्म ही हमारा भविष्य तय करते हैं।
जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में आज मुनि वीरभद्र (विराग) ज़ी ने कहा कि मरना किसी समस्या का हल नहीं है। समस्या तो जस की तस रहती है और व्यक्ति दुनिया छोड़ कर चला जाता है। उन्होंने कहा कि तत्व की संवेदनशीलता जब उधेड़ने लगती है तब व्यक्ति निराशा जनक सोच से घिर जाता है। इसीलिए व्यक्ति आत्महत्या करने जैसी बात सोचता है। मुनिश्री ने कहा कि जो कुछ भी होता वह अपने कर्मों की वजह से होता है।
मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि जिस दिन भीतर तत्व ज्ञान आ जाएगा, उस दिन से जीवन में घट रही सारी उथल-पुथल शांत हो जाएगी, फिर कोई परेशानी आपके जीवन में नहीं रहेगी। दुख,दुख नहीं रहेगा। दर्द,दर्द नहीं रहेगा। मन में शांति आ जाएगी। आखिरकार सब कुछ हमें यही छोड़ जाना है, फिर दुख किस बात का। हम वस्तुओं से मोह नहीं छोड़ पाए इसीलिए उसके जाने और आने पर दुखी और खुश हो जाते हैं। तत्वज्ञान आ जाए तो हमें किसी चीज का मोह नहीं रहेगा। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

