चेतन को जागृत करना आवश्यक- मुनि वीरभद्र

चेतन को जागृत करना आवश्यक- मुनि वीरभद्र

राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 24 सितंबर।श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि चेतन के विपरीत दर्शन नुकसानदायक होता है। इसलिए चेतन को जागृत करना आवश्यक है। चेतन यदि जागृत हो जाए तो विपरीत कार्य नहीं होंगे।
जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में आज मुनि वीरभद्र (विराग) ज़ी ने कहा कि हमारी बुद्धि चेतन होते हुए भी जड़ हो गई है जिसे जागृत करना आवश्यक है, नहीं तो हमें काफी नुकसान होगा। पहले इस आर्य भूमि में वैराग्य कूट-कूट कर भरा था।

जैन दर्शन में ही महात्मा नहीं हुए बल्कि अन्य दर्शनों में भी महात्मा हुए हैं। पहले जैसा वैराग्य अब नहीं रह गया है। उस समय लोगों में त्याग की भावना प्रबल थी।


मुनि श्री वीरभद्र (विराग)जी ने कहा कि हमने अपने गुणों को खो दिया है। पहले हमने तत्काल निर्णय लेने की क्षमता थी लेकिन अब हम तत्काल निर्णय नहीं ले पाते। इसके लिए हमें चेतन को जागृत करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज हम पत्नी को पूछे बिना कोई निर्णय नहीं ले पाते।

चेतन जागृत हुआ तो हम तत्काल निर्णय ले पाएंगे। इसके लिए पुरुषार्थ करना होगा। उन्होंने कहा कि पुरुषार्थ करना हो तो मोक्ष प्राप्ति के लिए करो। परिणाम यदि पॉजिटिव हो तो मोक्ष अवश्य मिलेगा। हमें यह भव मिला है, इसका फायदा अवश्य उठाएं और आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ें। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

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