डोंगरगांव (अमर छत्तीसगढ) 1 अक्टूबर। पुरातन संस्कृति, संस्कार से विलग होकर मौजूदा पीढ़ी जहाँ पश्चयत सभ्यता की ओर भाग रही है वही नगर की बेटी ने जीवन के सार को जानकर दीक्षा लेना तय किया है। दीक्षार्थी भाविका का आगामी 4 अक्टूबर को संयम महोत्सव आयोजित किया गया है।
एक लम्बे समय तक साधु – साध्वीयों के सानिध्य में रहते हुए जीवन के मर्म को जानकर नगर के प्रतिष्ठित अमरचंद किशोरकुमार बोहरा परिवार की बेटी भाविका (भक्ति) बोहरा ने सयंम पथ पर चलने का संकल्प लिया।
जैन धर्म की पताका थामकर भगवान महावीर के सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह के सिद्धांत को जन जन तक पहुंचाने संकल्पपित बेटी को दादा अमरचंद, पिता किशोर बोहरा, माता श्रृद्धा बोहरा ने इस पथ पर आगे बढ़ने अचार्य भगवान ज्ञान गच्छाधिपति प्रकाश मुनि म.सा. के समक्ष दीक्षा अंगीकार हेतु आज्ञापत्र सौपा था।
जड़ों से जुड़ाव
करीब 20 हजार आबादी वाले शहर मे श्वेताबर और दिगंबर जैन समाज के लगभग डेढ़ सौ परिवार है। संख्या के लिहाज से आबादी भले ही कम है किन्तु धार्मिक नजरिए से इसका बेहद गौरवशाली इतिहास है। शहर से अब तक 10 दीक्षा हो चुकी है। धर्म के सफर की शुरुवात गंगावती श्री जी म. सा. से हुई थी।
उसके बाद गृहस्थ जीवन त्याग कर दीक्षा अंगीकार करने वालों में सौरभ मुनि श्री, दिव्य दर्शन मुनि श्री. निर्जरा श्री जी, विरक्ता श्री जी, प्रज्ञा श्री जी, सुप्रज्ञा श्री जी, प्रार्थना श्री जी शामिल है। वही दिगंबर जैन समाज की आर्यिका 105 सारमति और आर्यिका 105 रजतमति माता धर्म की अलख जगा रही है।
गुरु का सानिध्य और प्रभु से नेह
बी काम तक लौकिक शिक्षा हासिल करने के बाद 2021 के चातुर्मास के दौरान निरंतर गुरुओं के सानिध्य और नित्य उनकी वाणी से भाविका को भक्ति की शक्ति का एहसास हुआ और यह जाना कि जीवन केवल भोग विलास के लिए नहीं है बल्कि सत्य, अहिंसा और संयम की राह पर चलकर ही आत्म कल्याण किया जा सकता है। उन्होंने करीब 4 साल वैराग्य काल बिताते हुए ग्रंथो में छुपे सार तत्वों को जाना।
पराया होता बाबुल का आँगन
गुरु की स्वीकृति मिलने के बाद भाविका आगामी 31 अक्टूबर को दीक्षा ग्रहण करेगी। यह कार्यक्रम राजस्थान के गढ़ सिवाना में होगा। इससे पहले आगामी 4 अक्टूबर को स्थानीय मंडी परिसर में संयम महोत्सव रखा गया है। इस दिन बहन के रूप में भाविका अपने भाइयो को आख़री बार राखी बांधेगी। इसी दिन दीक्षार्थी क्षमापना भी होगा। इस आयोजन के बाद आगामी 28 अक्टूबर को उसकी घर से बिदाई होगी।
बच्चों को बनाएं संस्कार वान
दीक्षा के पहले चर्चा करते हुए भाविका ने धर्म, संस्कृति से विलग होती मौजूदा पीढ़ी के सवाल पर कहा कि बच्चों को शिक्षित बनाने के साथ उन्हें संस्कारवान बनाना बेहद जरूरी। प्रत्येक माता पिता का दायित्व है कि बचपन से अपने बच्चों को भारत की गौरवशाली संस्कृति, परम्परा, नैतिकता का सबक सिखाने के साथ धर्म का भी मर्म बताएं। पाश्चात्य सभ्यता का खतरनाक बताते हुए कहा कि अंधे अनुकरण के कारण धर्म, सामाजिक सहित विभिन्न क्षेत्र मे बुराइयां पैदा हो रही है।

