निंदा करने से सम्यक दर्शन कागुण चले जाता है- मुनि वीरभद्र

निंदा करने से सम्यक दर्शन कागुण चले जाता है- मुनि वीरभद्र


राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 𝟭𝟭 अक्टूबर। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि निंदा करने से सम्यक दर्शन का गुण चले जाता है। इसलिए निंदा करने से बचें। उन्होंने कहा कि आने वाले पंचम काल में साधुओं,साध्वियों, श्रावकों एवं श्रविकाओं का आचार- व्यवहार बदल जायेगा।


जैन बगीचे में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि साधु-साध्वी, श्रावक – श्रविका सभी समय के अनुसार बदलते जाएंगे, वे जिनवाणी का श्रवण तो करेंगे लेकिन उसका तथा संतो के उपदेशों का पालन नहीं करेंगे। लोग एक-दूसरे की निंदा में लगे रहेंगे।

उन्होंने कहा कि कई विषम परिस्थितियां आयेंगी लेकिन यह समय गुजर जाएगा। उन्होंने कहा कि कैसी भी विषम परिस्थिति आ जाए लोगों को उसे घबराना नहीं चाहिए। समय बदलता रहता है और यह समय भी बदल जाएगा, आपको बस समय बदलने का इंतजार करना है।


मुनि श्री वीरभद्र ( विराग )जी ने कहा कि समय-समय पर अनेक परिवर्तन होते रहेंगे। कुछ अच्छा तो कुछ बुरा लेकिन यह स्थाई नहीं रहेगा और आता जाता रहेगा इसलिए बुरी परिस्थितियां आई है तो निकल भी जाएगी और कल अच्छी स्थिति भी आ जाएगी। आप अपना आत्म कल्याण का मार्ग ना छोड़े और साधनारत रहें। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

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