राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 12 अक्टूबर। बाल संत भव्य मुनि ने कहा कि जब तक अपने अंदर का अहम खत्म नहीं होगा, तब तक विकास के द्वार नहीं खुलेंगे। उन्होंने कहा कि स्व विकास के लिए अपने अहंकार को हटाना पड़ेगा और आराधना का मार्ग गतिशील करना होगा।
जैन बगीचे के नेम भवन में भव्य मुनि ने कहा कि आप प्रवचन सुनते हैं किंतु उससे जुड़ी चीजों को नहीं पूछते या फिर जो समझ में नहीं आया उसे नहीं पूछते, आप मौन रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा उत्पन्न करें जो समझ में नहीं आया उसके बारे में पूछे।
इससे आपको प्रवचन का सार समझ में आएगा।भव्य मुनि ने कहा कि हम धर्म के बारे में कुछ नहीं जानते। हम धर्म को मिलेंगे यह तो तय है लेकिन धर्म हमें मिलेगा यह हमारी साधना पर निर्भर है। हमें स्वयं अपना आत्म अवलोकन करना होगा।
इधर उपाश्रय भवन में आज सुबह वीरभद्र मुनि द्वारा बच्चों का शिविर चलाया गया। पहला शेषन 8:45 से 9:45 तक चला जिसमें लड़के एवं लड़कियों को जैन धर्म की जानकारी देते हुए अंग्रेजी के 26 शब्द के बारे में बताया।
इसके बाद 11:00 बजे तक केवल लड़कियों के लिए अवेयरनेस शिविर “सावधान बहना” का आयोजन किया गया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

