राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 12 अक्टूबर। राम गुरु दरबार में एक से बढ़कर एक संयमी आत्माएं अपने आत्म कल्याण की ओर आगे बढ़ रहे है…।
बाल वय में मुमुक्षु आत्माएं दीक्षा लेकर श्रमण जीवन अंगीकार कर रहे है।
महापुरुषों की वाणी कभी खाली नहीं जाती…
स्मृति शेष आचार्य भगवन श्री नाना लाल जी म सा पूर्व में फरमा गए थे कि नवम पट्टधर के शासन काल में बहुलता से बाल ब्रह्मचारी दीक्षा लेंगे।
यह महापुरुषों की वाणी वर्तमान में सही हो रही है।
और हो भी क्यों न
महापुरुषों का अतिशय ही निराला होता है।
जो मुखारवृंद से निकल गया वो पत्थर की लकीर जैसा हो जाता है…।
ज्यादा दूर भूतकाल में जाने की जरूरत नहीं है
अभी वर्तमान में महापुरुष अपने मुखारवृंद से फरमाए वो प्राकट्य सत्य हो चुका।
जैसे
अभिमोक्षम
रिकॉर्ड 2000 के लगभग बच्चे
संयम शतम
100 दीक्षा तयसमय सीमा से पहले
1008 अठाई
सिर्फ 56 दिनों में
50,000 गाथा स्वाध्याय रोजाना
और भी कई अतिशय है जिन्हें बताने की जरूरत नहीं।
लोग कहते थे देशनोक छोटा गांव है वहां कैसे चातुर्मास हो पाएगा
और सर्वश्रेष्ठ चातुर्मास हो रहा है।
लोगों का रेला लगा हुआ है क्योंकि आचार्य भगवन का जन्मस्थली ग्राम है
जहां हम सोचना बंद कर देते है वहां से हमारे महापुरुष सोचना प्रारंभ कर देते है।
महापुरुषों की दीर्घ सोच का ही परिणाम है कि संघ में कई असंभव कार्य सरलता से हो जा रहे।
उन्नयन, मोक्षार्थी, अभिमोक्षम, परिवर्धनम, आई जैन माई जैन जैसे शिविर इसकी बानगी है।
अभी युवाओं का शिविर अरुणोत्तम हुआ।
आज के अतिव्यस्त बिजी शेड्यूल में युवा साथी भी अपना बहुमूल्य समय देकर शिविर में भाग लिए।
ये भी महापुरुषों का एक अतिशय है।
कई ऐसे उदाहरण है जो महापुरुषों के सोच के बाद वह परिणाम में बदल जाते है। हम तो सोचते है कैसा हो पाएगा और हो जाता है।
पूर्व में आचार्य भगवन का मदुरांतकम का चातुर्मास..
वर्तमान में देवरी अछोली, संबलपुर का चातुर्मास भी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है
हम सोचते है कैसे इन छोटे छोटे गांव जहां बमुश्किल 10/12 घर है वहां कैसे चातुर्मास होगा पर भगवन की दूरदृष्टी सोच से सब कार्य सफल हो जाता है।
आज देश के इतिहास में पहली दफा तीन छोटे छोटे संघ मिलाकर एक चतुर्मास हो रहा है
जो देश में सबसे सफल चातुर्मास की गिनती में शामिल हो रहा है।
महापुरुषों की वाणी और उनकी सोच असंभव को संभव बना देती है।
पूर्व में महापुरुषों का अतिदुर्गम क्षेत्रों में विचरण करना हो। पूर्वोत्तर का रास्ता,पश्चिम क्षेत्र, दक्षिण क्षेत्र के रास्ते आज सुगम हो गए है।
पहले इन क्षेत्रों में विचरण करना बहुत ही कठिन था
यहां दूर दूर तक गोचरी पानी की सुगमता नहीं थी।
ऐसे कई अतिशय है जिनको इस कलम से लिखना मुश्किल है।
फिर भी एक प्रयास…..।
लिखने में त्रुटि की संभावना हो सकती है
लिखते समय कोई भी अविनय अशातना हुई हो तो
खमत खामना
✒️ SLB

