वीतराग की राह पर कदम बढ़ाते हुए नगर की बेटी भाविका बोहरा

वीतराग की राह पर कदम बढ़ाते हुए नगर की बेटी भाविका बोहरा

गढ़ सिवाना राजस्थान(अमर छत्तीसगढ) 28 अक्टूबर। सांसरिक जीवन से मोह भंग होने के बाद वीतराग की राह पर कदम बढ़ाते हुए नगर की बेटी भाविका बोहरा ने मंगलवार को बाबुल का आंगन हमेशा के लिए छोड़ दिया। पारिवारिक और सामाजिक जनों ने उसके शुभ भावों की अनुमोदना करते हुए बिदाई दिया।

मुमुक्ष भाविका राजस्थान के गढ़ सिवाना में आगामी 31 अक्टूबर को आयोजित समारोह में पूज्य ज्ञान गच्छाधिपति प्रकाश म सा से दीक्षा अंगीकार करेगी।

उल्लेखनीय है कि नगर के प्रतिष्ठित और धर्मनिष्ठ अमरचंद- किशोर बोहरा की पुत्री भाविका ने करीब चार साल वैराग्य काल बिताने के बाद दीक्षा ग्रहण करने का संकल्प लिया था। आत्म कल्याण की राह पर चलने संकल्पित बेटी के भावो को देखते हुए परिजना ने पूज्य ज्ञान गच्छाधिपति प्रकाश म सा को आज्ञापत्र सौंपा था।

भाविका के भावों, त्याग और धर्म के प्रति निष्ठा को देखते हुए आचार्य प्रकाश म सा ने दीक्षा की अनुमति प्रदान किया। दीक्षा के क्रम में बीते दिनों संयम महोत्सव का आयोजन शहर में किया गया था।

जिन शासन को आगे बढ़ाए

गढ़ सिवाना रवाना होने के पहले मौजूद जनों को संबोधित करते हुए भाविका ने कहा कि वह आत्मकल्याण की राह पर जा रही है इसलिए सभी खुशी के साथ बिदा करें। उन्होंने कहा कि संयम की राह पर चलने का मौका सभी को नहीं मिलता किन्तु उन्हें यह मौका मिला है सभी यह भावना रखे कि वीतराग की राह पर कदम हमेशा आगे बढ़ते रहें ।

उन्होंने शहर की सराहना करते हुए सभी से मिलजुलकर रहने और जिन शासन को आगे बढ़ाने कहा। बिदाई कार्यक्रम का भजनों के साथ संचालन वंदना पारख ने किया। इस मौके पर नन्ही आराध्या बोहरा और नव्या बोहरा ने भी अपने भाव प्रकट किए।

छूटा आंगन, छलक पड़े आंसू

करीब 25 सालों तक बोहरा परिवार की शोभा रही भाविका मंगलवार को हमेशा के लिए बाबुल के आंगन को छोड़ते हुए संयम के पथ पर आगे बढ़ गई। यहां आयोजित बिदाई समारोह में तब बेहद मार्मिक नजारा देखने मिला जब नाजों से पली भाविका को परिजनों और सामाजिकजनों से सांसरिक रिश्तों से विलग हो गई।

इस दौरान मौजूद जनों की आंखे डबडबा गई किन्तु इस बात का संतोष देखा गया कि बेटी धर्म पताका थामकर वीतराग की राह पर कदम बढ़ा रही है।

भाविका ने अंतिम चरण में लापसी को हाथ लगाया जिसे बाद में वितरित किया गया दीक्षार्थी भाविका के आगे बढ़ते ही भाईयों ने कुछ दूर तक अपने हाथों में बैठाकर बिदा किया।

Chhattisgarh