समता विभूति जैनाचार्य नानेश का कथन अक्षरशः सही साबित…. गुरु की दिव्य दृष्टि व शिष्य का समर्पण मिलता तो समय भी शीश झुकाता- वीना नाहर

समता विभूति जैनाचार्य नानेश का कथन अक्षरशः सही साबित…. गुरु की दिव्य दृष्टि व शिष्य का समर्पण मिलता तो समय भी शीश झुकाता- वीना नाहर

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 13 नवंबर।
(प्रकाश जैन)

व्यसन मुक्ति के प्रणेता जैनाचार्य श्री रामलाल जी म.सा.की दिव्य दूरदृष्टि व उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म.सा.के अलौकिक आव्हान से गुरुदेव की जन्म धरा देशनोक में बुधवार को अनुपम स्वर्णिम अध्याय अंकित हुआ जिसने एक ऐतिहासिक पल साकार कर दिया है।ये महज जैन समाज व साधुमार्गी संघ के लिए नही वरन संपूर्ण मानव समाज लिए प्रेरणा स्रोत है।
श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी महिला संघ के प्रमुखों में से एक राष्ट्रीय पदाधिकारी,श्री राम गुरु की अनन्य भक्त, सुश्राविका, शिक्षाविद् वीना नाहर ने संघ के इस स्वर्णिम अध्याय के अनुपम आयोजन के बाद अमर छत्तीसगढ़ के राजस्थान प्रमुख प्रकाश जैन से एक खास भेंट मे गौरवान्वित होते हुए बताया कि मुझे ही नहीं देश विदेश में रह रहे लाखों साधुमार्गी संघ के श्रद्धालु श्राविकाओं को अपने आराध्य गुरु पर जबरदस्त नाज है। समता विभूति स्व.जैनाचार्य श्री नाना गुरु के पाट को वे अपने दिव्य संयम, साधना, आराधना द्वारा जिनशासन को जोरदार दीपा रहें हैं।

पूज्य गुरु भगवन् श्री नाना गुरु का कहा आज सच हो रहा है वे कह गए कि हुक्मगच्छीय
संघ के नवम पाट के महापुरुष संघ को जोरदार दिपायेंगे।वो आज अक्षरशः सही हो रहा है संपूर्ण जगत राम गुरु के कमाल एवम चमत्कार को देख रहा हैं,नमन कर रहा हैं। उनकी पावन निश्रा एवं सानिध्य को पाने हेतु संयम पथ के पथिक आतुर हैं।
संयम शतम्,सौ दीक्षाओं का विराट प्रकल्प, 12नवम्बर,2025 को 100 वीं दीक्षा के साथ पूर्ण हुआ वो भी निर्धारित समय से पूर्व।


प्रखर वक्ता एवं प्रबुद्ध चिंतक वीना नाहर ने अमर छत्तीसगढ़ के राजस्थान प्रमुख प्रकाश जैन से एक लंबी वार्ता करते हुए बताया कि ये केवल संख्या की सिद्धि नहीं, बल्कि आत्मजागरण, श्रद्धा और संयम की विजय का उत्सव है,अनुशासन की अद्वितीय कहानी है।
श्री राम गुरु संघ वाटिका में हर नवदीक्षित आत्मा के नाम के आगे जुड़ा गुरुदेव का नाम राम एक नाम नहीं, बल्कि जीवन का प्रकाशपुंज है।केवल सम्मान का प्रतीक ही नहीं अपितु उनके जीवन में रामतत्व के स्थाई प्रवेश का प्रतीक है।
मुमुक्षु संयमी आत्माओं में तो जैसे एक पावन होड़ सी मच गई है कि “मेरे नाम के आगे भी राम लगे।” यह प्रतिस्पर्धा नाम की नहीं बल्कि रामत्व को हृदय में धारण करने की भावना की है।


भौतिकता की चकाचौंध में युवा पीढ़ी समेत अनेक बन रहे हैं संयम पथ के पथिक
संघ की राष्ट्रीय प्रमुखा सुश्राविका वीना जी नाहर ने कहा कि आश्चर्य होता है कि आज की इस भौतिक चकाचौंध में भी अनेक युवा , युवतीयां, किशोर एवं प्रौढ़ सभी पूज्य गुरु भगवन श्री राम गुरु एवं पूज्य उपाध्याय प्रवर श्री राजेश गुरु सा के अनुशासन से प्रभावित होकर संयम के कठिन व जटिल पथ पर सतत अग्रसर हो रहे हैं।यह दोनों पूज्य महापुरुषों गुरु भगवन्तों के कठोर अनुशासन,आत्मबल एवंतेजस्विता का ही प्रभाव है।जिसने इतनी आत्माओं को आत्मशुद्धि की दिशा में प्रेरित किया।
पूज्य उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी महाराज सा का स्वप्न था कि 25 दिसम्बर 2025 तक सौ दीक्षाएँ पूर्ण होंगी लगभग दो वर्ष के भीतर
परंतु आज समय से पूर्व ही असीम गुरुकृपा व शिष्य-निष्ठा से यह स्वप्न साकार हुआ। जो यह सिद्ध करता है कि जब गुरु की दृष्टि व शिष्य का समर्पण मिलता है तो समय भी शीश नवाता है।”संयम शतम्” के सौ-सौ द्वारों पर जब दीक्षा का प्रभा-मंडल प्रज्वलित हुआ,तब समय स्वयं श्रद्धानत हुआ।यही तो वह चमत्कृति है जब भक्ति ने श्रद्धा की मूर्तियां गढ़ दीं!!
गुरुदेव श्री राम के नाम से जीवन
राममय हो उठा

शतम दिवस इतिहास में “संयम शतम् पूर्णाहुति दिवस” के रूप में सदा सदा अंकित एवं आलोकित
रहेगा।जहाँ आत्मा ने भौतिकता पर विजय पाई व गुरुदेव श्री ‘राम’ के नाम से जीवन राममय हो उठा। ये दिवस ये संदेश देता है कि आज भी त्याग,संयम और गुरु-आस्था का प्रकाश उतना ही प्रखर है।
यह दिखाता है कि भौतिकता के युग में भी आत्मा की पुकार सुनने वाले हृदय अब भी जीवित हैं।
कवियत्री वीना नाहर के राम गुरु के चरणों में श्रद्धा सुमन….
राम नाम की छाँव में जगा संयम का स्वप्न महान।
त्याग की ज्योति से दमक उठा हर एक प्राण।।
गुरु अनुशासन ने दिखाया आत्मा का मर्म।
भौतिक जगत में भी जागा अब संयम धर्म।।
“संयम शतम्” हुआ पूर्ण आज, गुरुकृपा के साथ।
“वीना” राममय हुआ जीवन, गुरुदेव का सिर पर हाथ!!
संयम शतम् की गाथा रचे, धरती धन्य बनाये।
आचार्य श्री रामलालजी का यश गगन छू जाये।
देशाणे के लाल ये, साधना की मिसाल।
जन्मभूमि पर हो रहा, संयम मालामाल।
उपाध्याय राजेश मुनि का, आह्वान हुआ सुहावन।
ज्ञान–ध्यान की सुरभि से, महके यह संघ का आंगन।।
दीक्षा शतक का यह, अनुपम अद्भुत विधान।
वीना” भवों भवों तक गूँजेगा, संयम का सम्मान।।

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