ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 14 नवंबर।
(प्रकाश जैन,वरिष्ठ पत्रकार)
ब्यावर में जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर अहिंसा के अवतार श्रमण भगवान महावीर स्वामी का दीक्षा कल्याणक संयम दिवस के रूप में पूरे हर्षोल्लास के साथ तप त्याग एवम धर्म ध्यान से मनाया गया।
नगर के विभिन्न जैन स्थानकों उपासरों, एवम मंदिरों में श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं ने भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर श्रद्धा, आस्था एवम समर्पण भावों को प्रकट करते हुए ,सामायिक साधना,भक्ति पूजा अर्चना कर अपने आराध्य प्रभु के प्रति गहरी भक्ति दिखाई।
साधु संतो एवम साध्वी मंडल की पावन निश्रा एवं संघ प्रमुखों के नेतृत्व में भगवान महावीर के संयमी यात्रा जीवन एवं जीवन दर्शन की व्यापक जानकारी खूब अभिभूत एवम पुलकित होते हुए पूरी श्रद्धा भक्ति से भगवान महावीर के खूब खूब जयकारे लगाते हुए उन्हे अंतर की गहराइयों से विधिवत तिखुतो के पाठ से तीन बार वंदना कर वंदन नमन किया।
भगवान महावीर के पावन आदर्शों की महती जरूरत- राजेंद्र कर्णावट,
जैन धर्म की दिव्य विभूति,नानेश पट्टधर, संयम सुमेरु जैनाचार्य विजयराज जी म.सा. के श्री साधुमार्गी शांत क्रांति जैन श्रावक के संघ अध्यक्ष संपतराज डेढ़ीया के नेतृत्व में संघ के राष्ट्रीय संरक्षक भाभाशाह राजेंद्र कर्णावट के मुख्य आतिथ्य में मेवाड़ी गेट बाहर कुंदन नगर स्थित श्री अखिल भारतीय साधुमार्गी शांत क्रांति जैन युवा संघ के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री प्रकाश जैन के आवास पर भगवान महावीर का जन्म कल्याणक अपार श्रद्धा भक्ति के साथ मनाते हुए भगवान महावीर के जीवन दर्शन पर आधारित भजनों की सरिता से समूचे क्षेत्र को गूंजा दिया।
श्री विजय गुरुदेव के अंतेवासी सुश्रावक गायक प्रकाश जैन, संघ महामंत्री कमल छलानी ने कभी वीर बनके,महावीर बनके चले आना प्रभु जी चले आना.. म्हारे आंगन आया मत जाओ महावीर. आसुंडा ढलकावे म्हारी आंखड़ली..
.. …जय बोलो महावीर स्वामी की घट घट के अंतर्यामी की…सहित अनेक भजन की प्रस्तुतियों की स्वर लहरियों से समूचे क्षेत्र को महावीर मय बना दिया।
इस मौके पर श्री कर्णावट ने कहा कि भौतिकता की चकाचौंध के वर्तमान समय में भगवान महावीर के आदर्शों एवम संदेशों की महती जरूरत हैं।
समाज के प्रमुख व युवा पीढ़ी आगे आकर महावीर के संदेशों का गांव गांव अलख जगाए। इस मौके पर संघ महामंत्री कमल छलानी, गणपत लोढ़ा, पारसमल जैन, सुरेंद्र लोढ़ा, विजयराज छलानी, प्रकाश जैन सहित संघ प्रमुखों ने शिरकत कर जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक पर
संयम के साथ जीने का संकल्प दोहराया।
जियो जीने दो का अलख जगाए- ढेडिया
ब्यावर साधुमार्गी शांत क्रांति संघ अध्यक्ष श्री ढेड़ीया ने कहा भगवान महावीर का दिव्य संदेश जियो और जीने दो की वर्तमान समय में खासी आवश्यकता है। इंसान मानव मात्र के कल्याण में अपने धन व शक्ति का उपयोग करें।प्रभु के संदेशों को आत्मसात कर भगवान महावीर के सच्चे अनुयाई बने। महावीर के संदेशों का अलख जगाने का हर श्रावक श्रविका को भव्य पुरुषार्थ करें तभी प्रभु के दीक्षा कल्याणक मनाना सार्थक होगा ।
बिरद भवन में संत महापुरुषों के सानिध्य में गूंजे महावीर के जयकारे
नया बास स्थित बिरद भवन में संघ संचालक श्रद्धेय नरेश मुनि जी म.सा. के आज्ञानुवर्ती,श्रद्धेय सत्य प्रकाश मुनि जी म.सा.श्री समकित मुनि जी म.सा आदि ठाणा 2 एवं जैनाचार्य श्री रामेश के शिष्य पर्याय ज्येष्ठ श्अनन्त मुनि जी ,शासन दीपक नीरज मुनि जी म सा आदि ठाणा 4 व शासन दीपिका महासती रोशन कंवर जी साध्वी पराग श्रीजी आदि ठाणा 6 के तत्वावधान मे सयंम दिवस पर संयुक्त प्रवचन मे सकल जैन समाज द्बारा मनाया गया।
अपश्चिम परम तीर्थंकर श्रमण भगवान महावीर स्वामी का दीक्षा कल्याणक मीगसर बदी दशम 14 नवंबर को शुक्रवार को पूरे भारतवर्ष मे सयंम दिवस के रुप मे मनाया जा रहा है ।सयंम दिवस का आगाज सामुहिक समायिक के साथ ग्यारह नवकार मंत्र का जाप 27 बार हे प्रभु मेरी एक ही पुकार मे भी बन जांऊ अणगार की स्वर लहरियों से पूरा क्षेत्र महावीर मय हो गया।
इस मोके पर श्रद्धेय श्री सत्य प्रकाश मुनि जी म.सा ने सयंम दिवस पर कहा सभी के जीवन मे सयंम एक बार जरूर आये,सयंम जीवन मे दो रास्ते है मोक्ष और देवलोक।
दीक्षा चिंतामणि रत्न है जो सब चिंता को दूर कर देता, कल्पवृक्ष है सारी ईच्छा पूरी हो जाती है, राजमार्ग है मोक्ष जगने का। थोडा सा सयंम गरीबी से अमीरी मे बदल जाती है। सब समस्या का समाधान गुरु सेवा मे होता है। जितना मन ऐकांत वाद मे रहेगा उतना मन स्वच्छ होगा।
शासन दीपक श्री नीरज मुनि जी म सा द्वारा ,श्रीमद आचारांग सूत्र के द्वितीय स्कध के पन्द्रहवे अध्ययन मे दीक्षा का संकल्प का वाचन करते महावीर की दीक्षा कैसे हुई कैसी प्रतिज्ञा थी वो कैसे पुरी हुई आदि बताया गया।
राजन मुनि जी व समकित मुनि जी म सा द्वारा महावीर के भजन प्रभु महावीर भक्ति केसे निकले आप घर छोडकर जी,माया ममता मोह का महान बंधन तोडकर तोडकर कैसे निकले आप घर छोडकर छोडकर..म सा ने भजन से वीर माता पिता पर कहा जिनशासन को सोपे यह रत्न, वीर परिवार के प्रति है धन्य हे मात पिता जो अपना सब कुछ छोडकर उवार रहे अपने कुल की चिंता छोडी बच्चों का जीवन संवार रहे।
ब्यावर जैन समाज के वीर परिवार अशोक कोठारी, संजय बाठिया जितेन्द्र पोखरणा, सुगन कावडिया, हुक्मीचंदमुथा, रिखब नाहटा,विनोद चौरडिया,शांति लाल ललवाणी, निर्मल कोठारी परिवारो का परिचय कराकर गुणगान म सा द्वारा किये गये।धन्य है वह माता पिता जिनके यह सुमन पाये दीक्षा धन,अगले सयंम दिवस तक नित्य तीन मनोरथ चिंतन।
संचालन महामंत्री धर्मीचंद औस्तवाल ने करते हुए कहा आज की प्रभावना साधुमार्गी जैन संघ सबकी दी गई । संघ अध्यक्ष गोतम चंद चौधरी ने कहा धन्य धन्य वह वीर मात पिता उनका संघ अभिनंदन करता है।

