ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 22 नवंबर।
परम पूज्य प्रवर्तक श्री पन्ना गुरु एवम युग पुरुष श्री सोहन गुरु संघ के नवदीक्षित संत,ब्यावर के जन्मे जाए विद्वान संत श्री धैर्य मुनि ने अपने सहयोगी संत धीरज मुनि के साथ ससंघ स्कूल समिति व बच्चों के विशेष आग्रह पर प्रदेश जिले की ख्याति प्राप्त शिक्षण संस्था के डी जैन स्कूल,
नरबदखेड़ा में पदार्पण कर भव्य मंगल प्रदेश किया। इस मौके पर के डी जैन शिक्षण संस्था के संस्थापक (आका) रहे श्री दौलत गुरु (धैर्य मुनि) को अपने बीच पाकर विद्यालय परिवार के बच्चें खूब अभिभूत एवम पुलकित दिखाई दिए। के डी जैन स्कूल के बच्चों,स्टाफ अभिभावकों सहित ब्यावर सहित प्रदेश के अनेक क्षेत्रों से आए जैन जैनेतर समाज के विभिन्न घटकों के प्रमुखों सहित श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं ने जैन संतो को विधिवत जैन वन्दना से वंदन नमन कर स्वागत किया।
जिनवाणी की दिव्य जन जागरणा,भगवान महावीर के संदेशों का अलख जगाते संत आ रहे हैं ब्यावर
ब्यावर की वीर तपो धरा पर जन्मे जाए जैन संत धैर्य मुनि एवं धीरज मुनि जी अपना आसींद चातुर्मास पूर्ण कर जैन समाज ब्यावर के पुरजोर आग्रह पर ब्यावर पधार रहे हैं उल्लेखनीय हैं किनव दीक्षित दोनों संतों ने अब से 6 माह पूर्व बिजयनगर में संयम पथ के पथिक बने थे।
उन्हे संघ की प्रमुख साध्वी डॉ दर्शनलता श्री जी महाराज ने अपने मुखारविंद से जैन भगवती दीक्षा प्रदान कर संयम पथ के दिव्य मार्ग पर आरूढ़ किया था। लगभग 200 किलोमीटर से ज्यादा पैदल विहार यात्रा करते हुए अहिंसा के अवतार श्रमण भगवान महावीर के पावन संदेशों एवम श्री पन्ना गुरु,श्री सोहन गुरु के आदर्शों का गांव गांव,ढाणी ढाणी में अलख जगाते हुए जैन संतों का ब्यावर में एक पखवाड़ा से ज्यादा प्रवास रहेगा।
जैन संतों का प्रवास ब्यावर के प्रमुख जैन स्थानक श्री वीरस्थानकवासी जैन श्रावक संघ पिपलिया बाजार जैन स्थानक परिसर में होगा। पिपलिया जैन स्थानक में प्रवास से पूर्व संत मंडल नगर के विभिन्न स्थानक, उपसरों एवं शिक्षण संस्थानों में जिनवाणी की बरखा बरसाएंगे।

आसींद से ब्यावर तक की बिहार यात्रा में गांव-गांव ढाणी ढाणी में जिनवाणी का व्यापक प्रचार प्रचार करते हुए लोगों को धर्म संदेश देते हुए ब्यावर पधार रहे हैं।

के डी जैन स्कूल में 03 दिन रहेगा प्रवास,संतो के सानिध्य में होंगे विविध कार्यक्रम
केडी जैन स्कूल नबरत खेड़ा में जैन संतों का 03 दिन का अल्प प्रवास रहेगा।केडी जैन स्कूल के निर्देशक सुयश अंशुल तातेड ने राजस्थान लहर को एक जानकारी में बताया कि के डी जैन शिक्षण समिति एवं बच्चों के पुरजोर आग्रह पर दोनों जैन संतों का आज स्कूल परिसर में दिव्य पगलियों के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ ।
जैन संत धैर्य मुनि सा को अपने बीच पाकर सभी बच्चे प्रफुल्लित एवम प्रफुल्लित दिखाई दिए। निदेशक सुयश अंशुल तातेड ने बताया कि संत मंडल का स्कूल परिसर में अल्प कालीन प्रवास रहेगा के दौरान नियमित प्रवचन, प्रार्थना,धर्म तत्व चर्चा के साथ बच्चों की जिज्ञासाओं के समाधान हेतु विशेष गोष्ठियों का आयोजन होंगे।

निदेशक सुरेश हिमांशु तातेड ने बताया कि स्कूल परिसर में अल्प कालीन प्रवास के बाद जैन संतों का ब्यावर के उप नगरों में प्रभावी विचरण होगा।आगामी रविवार को ब्यावर के हार्ट स्थल अजमेरी गेट से संतो का भव्य मंगल प्रवेश होगा ।
जैन संत नगर में भव्य मंगल प्रवेश के बाद शहर के प्रमुख जैन स्थानक पिपलिया बाजार में प्रवास करेंगे श्री वीर स्थानक वासी संघ के अध्यक्ष, प्रखर वक्ता कोकिल कंठी गायक महेंद्र सांखला ने बताया कि संत मंडल के प्रवास के दौरान सवेरे प्रार्थना,व्याख्यान एवं विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
शाला परिवार ने बिछाए पलक पांवड़े
श्री के डी जैन स्कूल के संस्थापक रहे अब आध्यात्मिक गुरु संत धैर्य मुनि के शाला परिवार में बच्चों सहित सम्पूर्ण परिवार ने पलक पांवड़े बिछाकर स्वागत किया। संपूर्ण स्कूल परिसर को जैन फ्लेक्स एवम स्लोगो से सजाकर आमजन को धर्म से जुड़ने का संदेश दिया।
स्कूल परिसर का सम्पूर्ण परिसर एवम माहौल आध्यात्म एवम धर्म से गूंज उठा। समूचा क्षेत्र नवकार महामंत्र की स्वर लहरियों से गुंजायमान हो गया। स्कूल के छात्र छात्राएं सहित श्रदालुओ ने सामायिक साधना के साथ धर्म ध्यान में गहरी डुबकियां लगाई।

धैर्य मुनि बोले मुझे दुख है कि मैं 25 वर्ष पूर्व पहले संयम पथ का पथिक क्यों नही बना
जैन संत धैर्य मुनि ने राजस्थान लहर से विशेष भेट में बताया कि संयम मार्ग में गतिशील होने के बाद उन्हें संयम साधना के दिव्य मार्ग में अपार सुख,शांति एवं आनंद की दिव्य अनुभूति हो रही है। उन्हें इस बात का मलाल एवं गहरा दुःख है कि यह कदम उन्होंने 25 वर्ष पूर्व क्यों नहीं उठाया। 25 वर्ष पूर्व संयम पथ के पथिक क्यों नहीं बने।
धैर्य मुनि बोले मोक्ष पाने हेतु जीवन में संयम लेना नितांत जरूरी है।संयम के बिना जीवन अधूरा है।हम फक्कड़ और फकीर हैं। करोड़ों अरबों की संपदा के मालिक,राजा महाराजा, मंत्री अधिकारी गण भी जैन संतों के दर्शन एवं समागम को तरसते हैं। हम अपने संयम साधना आराधना से आत्मा से परमात्मा बनने की और गतिशील हैं।

बच्चों को बीच बोलते हुए जैन संत ने कहा कि आप देश केभावी निर्माता है। अपने अभिभावकों एवं गुरुजनों से सदैव मान सम्मान करें। उनके निर्देशानुसार अपने जीवन को एक अच्छे आयाम की और गतिशील करने का सदप्रयास करें। जिस बच्चे कर जीवन में सेवा भावना एवम अनुशासन नहीं है वह बच्चा अपनी मंजिल को पाने में नाकाम रहेगा।
गुरु के बताए मार्ग से बच्चा अपनी मंजिल को सहज पा लेता है। बच्चों में अनुशासन होना नितांत जरूरी ह उन्होंने कहा कि इंसान में मानवता जरूरी है मानव कल्याण हेतु अपनी शक्ति एवं धन का उपयोग करें। इस मौके पर वीर धर्म सहायिका सरोज तातेड़ ने संतों एवम अतिथियों का साधुवाद जताते हुए सभी का स्वागत किया।
दादा महाराज को देखते ही नन्हे नौनिहाल हुए हर्षित
सांसारिक पक्ष के पोते पोतीयों ने जब अपने दादा महाराज को स्कूल परिसर में आते देखा तो खूब हर्षित हुए, पोता तो हाथ जोड़कर उनकी गोद में जा बैठा। संत धैर्य मुनि ने दया पालो के संबोधन से खूब आशीर्वाद देते हुए बड़े होकर संयम मार्ग पर चलने की नसीहत दी।
नन्हें पोते पोतियों ने दादी के कहने पर तिखूतो के पाठ से 03 बार वंदना कर अपने दादा महाराज सहित संत श्री का अभिनंदन किया।
संत दर्शनों को उमड़े श्रद्धालु
जैन संतो के पावन दर्शनों हेतु ब्यावर, आसींद,जवाजा, बिजयनगर भीलवाड़ा सहित अनेक क्षेत्रों के श्रद्धालु भक्त श्रावक श्राविकाओं ने संत मंडल के दर्शनों हेतु उमड़े। नगर के प्रमुख श्री जैन वीर संघ के प्रमुखों सहित ब्यावर नगर के विभिन्न सामाजिक धार्मिक एवम राजनेतिक संगठनों से जुड़े लब्ध प्रतिष्ठित,
गणमान्य नागरिकों एवम भक्त श्रद्धालु ने संघ के वरिष्ठ संत धैर्य मुनि के श्री चरणों में बैठकर आशीर्वचन लिए। सभी को जैन संतो ने दिव्य मांगलिक प्रदान कर नित्य प्रति धर्म आराधना प्रार्थना करने को आह्वान किया। इस मौके पर सुश्राविका सरोज तातेड परिवार ने सभी का प्रभावना देकर सम्मान एवम स्वागत किया।
गुरुजन के विहार सेवा में उमड़े भक्त
आसींद, जवाजा से ब्यावर तक की संत मुनिराज के विहार यात्रा में तीनों संघ के युवा वर्ग का जबरदस्त उत्साह एवम सेवा भाव झलका। शनिवार को
दोनो संतो के साथ विहार मार्ग में महावीर नाहर,अंकित कोठारी, अनराजतातेड,संपत राज नाहटा, महावीर भंडारी ,दीपचंद नाहटा, मोहित भंसाली ,सुंदर लाल नाहर भागचंद बोहरा, अंकित रूनीवाल सुप्रीम भंडारी, हर्ष भंडारी,राहुल रूनीवाल,हिमांशु रूनीवाल तरुण कोठारी, गौतम संचेती संपत बांठिया पार्थ तातेड, प्रिंस मकाणा, पीयूष अजमेरा, श्रेय जैन,अंकुश लोढा सुयश तातेड, हिमांशु तातेड, पवन तातेड सहित महिला मंडल की श्राविकाओं ने सेवा कर गुरु भक्ति का परिचय दिया।

