संत दर्शन हेतु श्रद्धालु भक्तों का ब्यावर पहुंचने का सिलसिला जारी… संसार सागर से तिराने वाली एकमात्र माता है, अष्टप्रवचन – धैर्य मुनि

संत दर्शन हेतु श्रद्धालु भक्तों का ब्यावर पहुंचने का सिलसिला जारी… संसार सागर से तिराने वाली एकमात्र माता है, अष्टप्रवचन – धैर्य मुनि

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 9 दिसम्बर।

अष्टप्रवचन माता ही हमारी असली माता है।जिस प्रकार जन्म देने वाली माता अपने बच्चों का निर्वाह,पालन पोषण करती है ठीक वैसे ही अष्ट प्रवचन माता प्राणी मात्र को संसार सागर से पार कराती है। ये उदगार जैन संत धैर्य मुनि ने पिपलिया बाजार जैन स्थानक में नियमित प्रवचन श्रृंखला के दौरान व्यक्त किए।


संत धैर्य मुनि ने अपने मर्म स्पर्शी उदबोधन में कहा कि जन्म देने वाली माता तो जीवन का निर्माण करती है पर अष्ट प्रवचन माता जीवन को संस्कारित पल्लवित करते हुए जन्ममरण के चक्र को मिटाने वाली होती है।


विवेक पूर्ण जीवन जीने की कला सिखाती है अष्टप्रवचन माता
अष्ट प्रवचन माता हमें विवेकपूर्ण तरीके से चलने, बोलने, खाने पीने व दैनिक व्यवहार को जीना सिखाती है।मन में शुभ भाव, वचन से मृद भाषा व शरीर से सेवा भाव करने की सीख अष्ट प्रवचन माता देती है।


उन्होंने कहा कि अष्ट प्रवचन माता प्राणी मात्र को जीवन जीने की कला सिखाती है। अतः जीवन को आदर्श बनाने वाली अष्ट प्रवचन माता को जीवन में धारण करना चाहिए।

इसी के साथ साधु जीवन में आहारचर्या के पालन पर प्रभु महावीर की आज्ञा के अनुसार आहारचर्या की विधि पर विस्तार से प्रकाश डाला। शुद्ध आहारचर्या से प्रत्येक साधु साध्वी अपने संयम का निर्वाह अच्छे ढंग से कर सकता है।

इस मौके पर ब्यावर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भक्त श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओ ने जिनवाणी में गहरे गोते लगाते हुए मानव जीवन की सार्थक करने का दिव्य पुरुषार्थ किया।


संत मण्डल के प्रवास से युवाओं का धर्म ध्यान के प्रति गहरा रूझान
संत मंडल के पावन दर्शनार्थ हेतु प्रदेश सहित देश भर से श्रद्धालु भक्तों का ब्यावर पहुंचने का सिलसिला सतत जारी हैं। संत मंडल के लगभग एक पखवाड़े के प्रवास में युवाओं में धर्म ध्यान के प्रति गहरा रूझान बढ़ा है।

संत मंडल के प्रवास स्थल गांधी आराधना भवन में तप त्याग एवं धर्म ध्यान का जोरदार ठाठ लगा हुआ है। दिन भर श्रद्धालु श्रावक श्राविकाएं सामायिक साधना के साथ धर्म ध्यान में रंगे हुए दिखाई दे रहे हैं।

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