ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 11 दिसम्बर।
(प्रकाश जैन वरिष्ठ पत्रकार )
जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर अहिंसा के अवतार, शासनपति श्रमण भगवान महावीर स्वामी ने अपनी देशना में फरमाया था कि अप्पा सो परमप्पा अर्थात आत्मा ही परमात्मा है।हमें धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा रखनी चाहिए।
ये विचार श्री पन्ना सोहन गुरु संघ के नवदीक्षित संत धैर्य मुनि ने व्यक्त किए। वे पिपलिया बाजार स्थित श्री वीर जैन स्थानक में प्रवचन शृंखला के दौरान बोल रहे थे। उन्होने कहा कि इंसान केवल धर्म धर्म ना चिल्लाएं अपितु धर्म के मर्म को समझने का भव्य पुरुषार्थ करें। जिस घर में धर्म ध्यान की बयार बहती है। का वासा होता है वहां लक्ष्मी का सदैव वासा रहता हैं।परिवार में सुख शांति एवम आनंद के हिलोरे सदा बना रहते हैं। इसलिए कहा गया है कि धर्म की जड़ सदा हरी।
अपार धन संपदा त्यागकर जैन साधु बने संत धैर्य मुनि
अपार धन संपदा एवम राजसी ठाठ बाठ त्यागकर गत 06 माह पूर्व संयम धारण कर जैन साधु बने नवदीक्षित संत धैर्य मुनि विगत एक पखवाड़े से ब्यावर में अल्पकालीन प्रवास कर रहे हैं।

प्रदेश के शिक्षा जगत में के डी जैन स्कूलों को नया आयाम देने वाले इस शिक्षाविद का सांसारिक मोह माया से ऐसा नाता छुटा कि वो अब जैन संत बनकर जिन शासन की दिव्य प्रभावना में ब्यावर के एक और जन्मे जाए संत धीरज मुनि के साथ नगर के युवाओं को धर्म मार्ग से जोड़कर पूरे शहर में धर्म ध्यान की गहरी अलख जगाने में पूरे समर्पण भावों से अपनी साधना के साथ जुटे हुए हैं।
संत धैर्य मुनि ने बड़े दुखी स्वर में बोलते हुए कहा कि भगवान महावीर के अनुयाई प्रभु महावीर को तो पूरी श्रद्धा आस्था से मानते हैं लेकिन भगवान महावीर की नहीं मानते। जिनवाणी तो केवल ज्ञानियों ने अपने ज्ञान से फरमाई है। हम थोड़ी सी तकलीफ में संकट में आते ही अलग-अलग स्थानो पर माथा टेकने लग जाते हैं।एक नाव की सवारी ही पार हो सकती है।

जिनवाणी जन्म मरण के दुखों को दूर करने में सहायक
उन्होंने कहा कि जैन धर्म बहुत गहन व सूक्ष्म धर्म है।जिनवाणी जीवन को सुखमय बनाती है। वह जन्म मरण के दुख से दूर करने का मार्ग बताती है| धैर्य मुनि ने भरत चक्रवर्ती का उदाहरण देते हुए बताया कि जब भरत चक्रवर्ती को तीन-तीन बधाइयां मिली जिसमें ऋषभदेव भगवान को केवल ज्ञान, पुत्र रत्न की प्राप्ति व आयुध शाला में चक्ररत्न उत्पन्न होने का संदेश प्राप्त हुआ ।
भरत चक्रवर्ती महापुरुष थे।उनकी धर्म पर प्रगाढ़ श्रद्धा थी | वे सभी कार्यों को छोड़कर सबसे पहले प्रभु ऋषभदेव के दर्शन करने पहुंचे | साथ में माता मरु देवी को भी चतुरंगिणी सेना के साथ हाथी के होदे पर सवार होकर प्रभु दर्शन की ओर पधारे | प्रभु के दर्शन करने पहुंचे तो देखा कि देवताओं ने समवशरण की रचना की ।
प्रभु देशना दे रहे हैं । मरु देवी माता शुक्ल ध्यान के उत्कृष्ट शिखर पर पहुंचते पहुंचते केवल ज्ञान हो गया । देव दुदुंभी बजने लगी । अहो ज्ञानम अहो ज्ञानम की गूंज होने लगी । भरत चक्रवती ने प्रभु दर्शन के बाद पुत्र रत्न व चक्ररत्न के कार्यक्रम में भाग लिया । भरत चक्रवर्ती के पास 14 रत्न थे 07 रत्न तो एकेंद्रीय व 07 रत्न पचेन्द्रीय के थे । 14 रत्न के स्वामी भरत चक्रवर्ती की धर्म के प्रति प्रगाढ़ श्रद्धा थी । अतः धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा होने पर ही सही मायने में प्रभु के अनुयायी हो सकते हैं।

03 दशक पहले संयम मार्ग का पथिक नहीं बनने का धैर्य मुनि को गहरा मलाल
श्री पन्ना सोहन गुरु संघ के विद्वान संत धैर्य मुनि जी म.सा.ने अपने अल्प कालीन प्रवास के दौरान सिटी डिस्पेंसरी के पास गांधी आराधना भवन में अमर छत्तीसगढ़ के राजस्थान प्रमुख वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश जैन से एक विशेष वार्ता में बताया कि संयम में आनंद ही आनंद है।संयम लेने के बाद उन्हें दिव्य सुख शांति की गहरी अनुभूति हो रही है संत धैर्य मुनि ने इस बात का गहरा दुःख एवम मलाल जताया है कि 03 दशक पहले संयम मार्ग का पथिक बनकर जैन दीक्षा क्यों नहीं ली। उन्हें इस बात का जैन साधु बनने के बाद बार-बार मलाल आता है।
नवदीक्षित संत धैर्य मुनि ने इस मौके पर भक्त श्रद्धालुओं के बीच धर्म एवम तत्व चर्चा में बोलते हुए कहा कि मानव जीवन अति दुर्लभ है,अनमोल हैं। अनेक अनेक पुण्यवाणी के चलते अनेक जन्मों के बाद मानव जीवन की प्राप्ति होती है। मानव जीवन को पाने हेतु देवता भी तरसते हैं। हैं। हमें इस अनमोल मानव जीवन का मानवता के हितार्थ लगाकर सदुपयोग करना चाहिए।
संतश्री ने इस बात पर जोर दिया कि इंसान को जीवन में एक बार संयम मार्ग जरूर लेना चाहिए। संत ने कहा कि हम मानव हैं मानवता का मन में दीप जलाएं, कर्म योग से जो कुछ पाएं वही हमारा सच्चा धन हो। उन्होंने कहा कि केवल 6 माह के दीक्षा काल में उन्हें गहरी शांति की अनुभूति हो रही है।
सहयोगी संत धीरज मुनि के साथ के साथ में साधना आराधना में तल्लीन रहकर अपनी आत्मा का उत्थान करने में पूरे समर्पण भावों से जुटे हुए हैं। उन्होंने समाज से अपनी शक्ति एवं धन का सम्यक उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की आज का युवा धर्म के मार्ग को गहराई से समझने में जुटा हुआ है। आवश्यकता है युवाओं को सही मार्गदर्शन की।उनके ब्यावर प्रवास में युवाओं में धर्म के प्रति गहरा रुझान बढ़ा हैं।
धैर्य मुनि के सांसारिक परिवार ने जताया गर्व,महावीर के शासन को दीपा रहे हैं संत
राजस्थान लहर के संवाददाता संत मंडल के प्रवास स्थल पर देखा कि श्रद्धालु श्रावक श्राविकाएं व भक्त
गण सामायिक साधना के साथ धर्म ध्यान, जप जाप,आराधना में भक्ति भावों के साथ गोते लगाते लगा रहे थे।
ब्यावर सहित आस पास के क्षेत्रों एवम प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से संत समागम का लाभ लेने एवम संत दर्शन करने हेतु श्रद्वालु भक्तों की ब्यावर में आवाजाही का सिलसिला निरंतर बना हुआ है।
संत धैर्य मुनि महाराज की सांसारिक वीर धर्म सहायिका सरोज तातेड, सुयश हिमांशु,सुरभीआयुषी सहित पुरे परिवार ने अमर छत्तीसगढ़ के राजस्थान प्रमुख प्रकाश जैन से खास बातचीत में बताया कि उन्हे आज बहुत खुशी एवम गर्व हो रहा है की तातेड परिवार का लौह पुरुष जिन शासन की दिव्य प्रभावना कर शासनपति भगवान महावीर के शासन को दीपा रहें है।
प्रकाश जैन,वरिष्ठ पत्रकार
आशीष जैन,फोटो जर्नलिस्ट
ब्यावर जयपुर

