ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 19 दिसम्बर।
विगत 06 माह पूर्व अपार संपदा छोड़कर संयम पथ के पथिक बने नगर के लब्ध प्रतिष्ठित परिवार से जुड़े 02 श्रावक जैन साधु बनकर अपनी जन्म भूमि ब्यावर में जैन धर्म की दिव्य पताका लहरा रहे हैं। दोनों दोनों जैन संत एक सप्ताह से विनोद नगर स्थित जय चौथ भवन में जिनवाणी का रसपान करावे कर रहे हैं ।
जय चौथ भवन में संत धैर्य मुनि ने धर्म सभा में कहा कि पावन मन मुक्ति का आधार होता है।मनुष्य को अपना मन सदैव शुद्ध रखना चाहिए 03 योगों से सबसे पहला स्थान मन का होता है। सबसे ज्यादा कर्मों का बंधन व निर्जरा मन के आधार पर होते हैं।
जिस तरह से भंवरा अपना मन रूपी फूल का रस पीने में लगाए रखता है। उसी में अपना जीवन पूरा कर देता है। शास्त्रों में मुख्य रूप से मन की व्याख्या तीन प्रकार से की गई वे हैं मरा मन,डरा मन,खरा मन।जो खड़े मन वाला होता है,वो वीरता एवं मजबूती से सारी क्रिया का समाधान कर लेता है मानव में मतभेद भले ही हो,मन भेद नहीं होना चाहिए,मन भेद होने से घर,परिवार,समाज सभी जगह आत्मीयता के भाव बढ़ते हैं। अतः मन को सदैव सरल रखना चाहिए।
श्री जैन जय चौथ संघ के मंत्री दुलीचंद मकाणा ने बताया कि संत मंडल शनिवार सवेरे लोकाशाह नगर स्थित ज्ञानम से विहार करके प्रताप कॉलोनी पहुंचेंगे जहां उनके प्रवचन सवेरे 9:15 बजे होंगे।संत धैर्य मुनि अपने सहयोगी संत के साथ रविवार को अपनी कर्म स्थली कुंदन नगर में प्रवास करेंगे।

जय गुरु चौथ भवन में 7 दिन बरसी जिनवाणी, भक्तों ने लगाएं गहरे गोते
संघ मंत्री दुलीचंद मकाणा ने बताया कि विगत एक पखवाड़े से नगर में प्रवास कर रहे हैं दोनों जैन संतों के ब्यावर के उपनगरों में प्रवास से धर्म ध्यान का अनुपम ठाठ लगा रहा। संत प्रवर ने एक सप्ताह तक विनोद नगर स्थित जय चौथ भवन में जिनवाणी का पावन बरखा बरसा कर श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं को भगवान महावीर की जिनवाणी में गहरे गोते लगवाए।

संतो के प्रवास से युवाओं का धर्म ध्यान के प्रति गहरा रूझान बढ़ा।संत धैर्य मुनि एवम धीरज मुनि के सानिध्य में श्रद्धालु भक्त सामायिक साधना के साथ धर्म ध्यान, तप जप में रत दिखाई दिए।

