संत मंडल कुंदन नगर से विहार कर साकेत नगर पहुंचे…. स्वाध्याय महान तप है – धैर्य मुनि

संत मंडल कुंदन नगर से विहार कर साकेत नगर पहुंचे…. स्वाध्याय महान तप है – धैर्य मुनि

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 23 दिसम्बर।
मानव का सबसे बड़ा पाप अज्ञानता है ज्ञान प्राप्त होने के बाद व्यक्ति पाप से दूर रहता है अतः जीवन में सफलता प्राप्त करने व ज्ञान का दीपक जलाने के लिए सबसे महानतप स्वाध्याय है। ये विचार संत प्रवर धैर्य मुनि ने कुंदन नगर में धर्म सभा में व्यक्त किए।
संत प्रवर ने कहा कि स्वाध्याय के द्वारा हम मुक्ति के सोपान तक पहुंच सकते हैं।

12 प्रकार के तपों में स्वाध्याय भी एक महान तप है। जो व्यक्ति नित्य स्वाध्याय का नियम रखते हैं वह अज्ञानता से दूर होकर ज्ञान का दीपक जला सकते हैं।
राजा भरत चक्रवर्ती ने शीर्ष महल में ध्यान करते- करते केवल ज्ञान को प्राप्त कर लिय। स्वाध्याय के द्वारा व्यक्ति अपना रहन सहन, खान-पान बोली चाली व व्यवहार में निपुण हो सकता है।स्वाध्याय सेआपसी प्रेम भाव बढ़ता है।


साकेत नगर जैन समाज ने संत मंडल की वंदना से की अगुवाई
संघ के वरिष्ठ श्रावक संपतराज नाहटा एवम अन्नराज तातेड ने बताया की संत धैर्य मुनि अपने सहयोगी संत धीरज मुनि के साथ कुंदन नगर में अल्प कालीन प्रवास पूर्ण कर साकेत नगर जैन समाज की आग्रह पर साकेत नगर पहुंचे। जहां जैन समाज के श्रद्धालुओ ने संत मंडल की अगुवाई कर वंदना कर उन्हें मंगल प्रवेश करवाया।संत मंडल साकेत नगर में 03 दिन का प्रवास कर रामगढ़ पधारेंगे।

(प्रकाश जैन)

Chhattisgarh