ब्यावर सहित देश भर में शांति मुनि की दीक्षा जयंती संयम दिवस के रूप में मनाई…. गणाधिपति शांति मुनि संयम साधना के उच्च कोटि के साधक थे- जैनाचार्य विजय गुरु

ब्यावर सहित देश भर में शांति मुनि की दीक्षा जयंती संयम दिवस के रूप में मनाई…. गणाधिपति शांति मुनि संयम साधना के उच्च कोटि के साधक थे- जैनाचार्य विजय गुरु


ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 18 फरवरी।
(प्रकाश जैन)
जैन जगत की दिव्य विभूति संयम सुमेरु,वाणी के जादूगर, नानेश पट्टधर, संघनायक जैनाचार्य प्रवर श्री विजयराज जी म.सा.ने संघ के गणाघिपति महास्थविर प्रमुख जैन संत शांति मुनि महाराज को उच्च कोटि के साधक बताते हुए संयम साधना की दिव्य विभूति से निरूपित किया।
प्रवचन प्रभाकर जैनाचार्य प्रवर श्री विजय गुरुदेव ने संघ के प्राण
गणाघीपति की दीक्षा जयंती के पावन अवसर पर एक विराट धर्म सभा मे बोलते हुए गणाधिपति श्री का स्मरण करते भावुक हो गए। जैनाचार्य प्रवर की आंखे नम हो गई।

उन्होंने कहा कि बड़े महाराज सा शांति मुनि जी ने संघ को नए आयामों की और गतिशील किया है।मैं आज जो कुछ हूं उसके पीछे पूज्य गणाघिपति श्री जी का दिव्य आशीर्वाद एवम महर है।

वे बहुत सरल एवम सहज थे। युग पुरुष बड़े महाराज सा ने जीवन के अंतिम पड़ाव तक संघ के विकास एवम उन्नयन में पूर्ण रूपेण समर्पित रहे। उन्होंने अपने प्रभावी संयमी साधना से सैकडों मुमुक्षुओ को संयम मार्ग का पथिक बनाकर जिनशासन की दिव्य जहोजलाली की। वे उग्र विहारी थे, पूरे देश भर में लाखों किलोमीटर को पदयात्रा कर व्यसन मुक्ति का अलख जगाया।


संत युगप्रभ मुनि के निश्रा में संयम दिवस पर उमड़े श्रद्धालु
ब्यावर के जैनाचार्य विजयराज मार्ग स्थित नवकार भवन में तरुण तपस्वी संत प्रवर युग प्रभ मुनि की निश्रा में गणाघिपति शांति मुनि म.सा. का दीक्षा दिवस तप त्याग ,जप जाप धर्म ध्यान साधना आराधना के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं ने एक ही आसन पर 03 से 05 सामायिक व्रत की साधना कर महान योगी के श्री चरणों में अपनी श्रद्धा भक्ति प्रकट की। आज युवा संत मनीषी सूर्यप्रभ मुनि म सा की भी दीक्षा जयंती का सहज सुअवसर रहा।


धर्म सभा का आगाज सामूहिक नवकार महामंत्र के जाप से हुआ। समूचा क्षेत्र नवकार एवम शांति मुनि सा की जयकारों से गूंज उठा।

संत युगप्रभ मुनि ने युग पुरुष शांति मुनि म.सा. के जीवन दर्शन पर व्यापक प्रकाश डालते हुए सभासदों से उनके संदेशों को आत्मसात करने का आव्हान किया। संत प्रवर ने उन्हें जन जन की आस्था का केंद्र निरूपित करते हुए कहा कि संघ पर उनके अनंत उपकार है। साधना के बेजोड़ साधक के उपकारों को संघ भुलाए नहीं भूल सकता।

संत प्रवर ने कहा कि उन्होंने मन को जीत लिया था वे साधना के बहुआयामी व्यक्तित्व थे। वे साधना की अदृश्य शक्ति थे। वे अंतर एवम बाहर से एक थे। इस अवसर पर संत अभिनव मुनि ने कहा कि उनका जीवन जीवट जीवन था।

वे ज्ञान दर्शन चारित्र के बेजोड़ संगम थे।उनके जीवन से बहुत कुछ सीखकर इस दुर्लभ मनुज जीवन का उत्थान किया जा सकता है। धर्म सभा का संचालन संघ के मीडिया प्रभारी युवा संघ के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री प्रकाश जैन ने किया।

इस अवसर पर युवा संघ अध्यक्ष विनोद लोढ़ा ने गणाधिपति श्री शांति मुनि म.सा.के जीवन दर्शन पर एक भक्तिमय भजन की अनुपम प्रस्तुति देकर भक्त श्रद्धालुओ को भाव विभोर कर दिया। भामाशाह राजेंद्र कुमार ललित कुमार लोढ़ा ने श्रावक श्राविकाओ का प्रभावना देकर बहुमान किया। इस मौके पर ब्यावर सहित अनेक क्षेत्रों से धर्म प्राण भक्त श्रद्धालु गण ने शिरकत कर तप त्याग से अपनी आत्मा को कुंदन बनाया।


संयम पथ के पथिक बन सके वो दिन धन्य होगा
इस मौके पर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आईएएस राजू भाई भूरट एवम संघ संरक्षक भामाशाह राजेंद्र कर्णावट ने कहा कि गणाघिपति श्री संयम साधना की दिव्य प्रतिमुर्ति थे।ऐसे दिव्य महापुरुष के आशीर्वाद से हम संयम मार्ग के पथिक बन सके वो दिन धन्य होगा।


प्रकाश जैन वरिष्ठ पत्रकार
आशीष जैन फोटो जर्नलिस्ट
ब्यावर जयपुर

Chhattisgarh