ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 26 फरवरी।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म.सा ने समता भवन मे नियमित भगवान महावीर के प्रवचन की श्रृखंला से बताया भगवान महावीर को सुर्दशन पर्वत की उपमा दी गयी भजन से सत कर्म करो सत कर्म करो सत कर्म सदा शुभ फल देता, सब सकंट दूर हटाकर जीवन खुशियों से भर देगा।
म सा ने कहा जितनी भी अशुद्ध शक्ति हे वो सत कर्म से शुद्ध होती जा रही है इसलिए शक्तिया बढती जा रही है, राग घटने से शक्ति शुद्ध होती है।
म सा ने बताया मिथ्यात्व का सेवन करने से सभी शक्तिया क्षीण होती जाती है,भगवान का उलघन करने पर जन्म मरण का चक्कर बढता है। सातवी नारकी तक जा सकते है।
म सा ने कहा आज के समय स्थानक वासी लोग न जाने क्यो इधर उधर भटकते जा रहे है वह लोग मिथ्यादृष्टि बनते जा रहे है, वासना मे डूबते जा रहे उनकी दृष्टि इधर उधर ढुंढने मे लगा रखे है,इसीलिए उनकी शक्तिया खत्म होती जा रही है।
म सा ने रावण महान विध्वान शक्तिशाली था स्वर्ग तक सिढिया बना सकता था वासना जाग्रत होने पर शक्ति मलिन होती गयी पर एक विशेषता भी थी जो सीता को अपरहण करके लाया पर उसकी तरफ हाथ नही लगाया इसी कारण उनकी शक्ति मलिन होने से भगवान राम के हाथो मारा गया।
म सा ने कहा आज लोग वर्षो से भारतीय संस्कृति को नष्ट करने की सोची समझी रणनीति चला रखी है इसकारण धीरे धीरे संस्कृति लुप्त होती जा रही है।पर साधुमार्गी संघ मे नये नये आयाम देकर संत सतियो की परीक्षा लेकर वह धर्म ध्यान मे लगे रहे साथ ही धर्म को बचाते रहे।
इससे पहले साध्वी श्री प्रखरश्रीजी म सा ने कहा सयोग से छूटना परित्याग के समान है। साधु साध्वी अणगार होते हे किसी प्रकार का ममत्व परिग्रह नही रखते, शरीर का आत्मा के साथ परिग्रह होता है। परिग्रह का कोई अंत नही, देललोक के देवता के पास भरपुर रिद्ध सिद्धि हीरे जवाहरत का खजाना होते हुए भी वह परिग्रह मे रहते थें।
आज राजश्री श्री श्रीमाल के नो के प्रत्याखान लिये गये।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

