ब्यावर (अमर छत्तीसगढ़) 13 मार्च।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य थोकडो के जानकार शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने समता भवन मे नियमित भगवान महावीर के प्रवचन की श्रृखंला से बताया भगवान महावीर मे सभी जीवो के प्रति क्षमा और मैत्री भाव थे हमे भी तीर्थंकर महावीर के धर्म को स्वीकार कर लिया तो बहुत सारे लाभ मिल जायेगा सबसे मधुर संबध होगा, राग द्बेष दुर होगा तो सुख ही सुख मिलेगा दुख से कोई संबध नही रहेगा।
म सा ने कहा इस संसार मे जो चीज दृष्यमान होती हे उससे हमारा कोई संबध नही होता सिर्फ एक मात्र आत्मा से संबध रहता है,आज जिनवाणी हमारे मन को सुलझाने का काम करती हे अगर एक बार व्यक्ति उलझ गया तो जन्मो जन्मो तक जन्म लेकर भी सुलझ नही पायेगा।पुण्य आत्मा जहां जन्म लेती सदा दान देता रहेगा।
म सा ने कहा जंहा झगडा होगा तो कषाए बढेगा इससे अच्छा वहां से हट जाये या चुप हो जाये। तमी मन शांत रहेगा,जब तक आयु होगी तब तक मरेंगे नही, किस्मत अच्छी होने से सब काम सही होते जायेंगे, गलती को स्वीकार करने से हार कर भी जीत जायेंगे क्योंकि सबसे सस्ता धर्म क्षमा का होता है।
म सा ने कहा संसार की जानकारी विनाश करने वाली होती है धर्म की जानकारी विकास करने वाली होती है। बिना कारण कुछ नही होता, किसी से बेर नही रखे नही तो बेर का बदला जन्म जन्म का चलता रहेगा वह किसी भी रुप मे हो सकता है जो हो रहा वह कर्मो से हो रहा।मैत्री भाव सबसे बडा होता है। युद्ध के विनाश को रोकने के लिए नवकार मंत्र की माला फेरनी चाहिए ताकि युद्ध बंद हो जाये।
इससे पहले श्री प्रखर श्री जी म सा ने कहा शुभ कर्म अनुकूलता लाता है बिमारिया कई प्रकार की होती है शारिरीक कमजोर करती है पैसा खर्च करवाती है,मानसिक सुख सुविधा होते भी सोचते रहते हे,देवीय प्रकोप होता हो जो भोगना ही पडता व कर्म की है जो जो पुरुषार्थ करने पर चली जाती है इसमे न पैसा लगता न डाक्टर की जरुरत पडती।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

