जांजगीर-चांपा (अमर छत्तीसगढ़) 6 मई
- मामूली विवाद बना जानलेवा, हत्या के मामले में 02 आरोपी को चंद घंटे में किया गिरफ्तार थाना पामगढ पुलिस की कार्यवाही
- आरोपियों द्वारा गला दबाकर, डंडा, हाथ मुक्का से मारपीट कर की हत्या
- आरोपीगण के विरूध्द धारा 103 (1), 238, 3(5) बीएनएस के तहत कार्यवाही कर भेजा गया न्यायिक रिमांड पर गिरफ्तार आरोपी-
देसाई कुम्हार पिता जयसिंह उम्र 42 साल निवासी खरखोद थाना पामगढ
रामनारायण प्रजापति पिता जयसिंह उम्र 44 साल निवासी ठाकुरदेवा चौकी मल्हार थाना मस्तूरी जिला बिलासपुर मामले का विवरण मृतक जगदीश प्रजापति अपनी पत्नी दिव्या और डेढ़ वर्षीय बेटे के साथ 29 अप्रैल को रिश्तेदार के विवाह कार्यक्रम में शामिल होने खरखोद गांव आया था।
रात करीब 11:30 बजे वह शराब के नशे में अपनी पत्नी और बच्चे के साथ विवाद करने लगा। बच्चे के ऊपर पैर रखने और गाली-गलौच करने पर पत्नी ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ गया।
इसके बाद जगदीश घर छोड़कर गांव में ही एक अन्य स्थान पर जाकर सो गया, सुबह पता किया तो वहां पर नहीं था, आस पास पता किया तो भी पता नहीं चला। दिनांक 3 मई को उसका शव गांव में एक घर के पीछे दीवार के पास संदिग्ध हालत में मिला, जिसके शरीर में सड़न शुरू हो चुकी थी।
सूचना पर मर्ग कायम कर जांच पंचनामा कार्यवाही में लिया गया। शव का पी.एम. कराया गया, पीएम रिपोर्ट के आधार पर, थाना पामगढ में अपराध कमांक 191/26 धारा 103 (1) भारतीय न्याय संहिता पंजीबद्ध कर विवेचना कार्यवाही में लिया गया।
हत्या के मामले को गंभीरता को देखते हुए प्रभारी पुलिस अधीक्षक जांजगीर चांपा श्रीमती निवेदिता पाल के निर्देशन में एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री उमेश कुमार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन में अज्ञात आरोपी का लगातार पतासाजी की जा रही है।
इसी कड़ी में एसडीओपी अकलतरा प्रदीप सोरी के नेतृत्व में थाना पामगढ पुलिस द्वारा आरोपी देसाई कुम्हार व रामनारायण प्रजापति को पकडा जिसको हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर गला दबाकर, डंडा, हाथ मुक्का से मारपीट कर हत्या करना जुर्म स्वीकार किए जाने से विधिवत गिरफ्तार कर दिनांक 05.05.26 को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
उपरोक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी पामगढ निरीक्षक सावन सारथी, उप निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू ASi संतोष बंजारे, प्रआर रामलाल मार्कडेय, राजेश कोशले, मंजू सिंह आरक्षक भुवनेश्वर पटेल, श्याम ओग्रे मआर सविता पटेल थाना पामगढ का सराहनीय योगदान रहा।

