रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 12 मई । नगर निगम रायपुर में टैंकर से पानी सप्लाई के ठेके में भारी वित्तीय अनियमितता और षड्यंत्र का मामला सामने आया है। नगर निगम द्वारा किये भुगतान दस्तावेज के मुताबिक पिछले दो सालों के 150 लाख के टेंडर में 373 लाख का भुगतान ठेका कम्पनियों को निगम ने किया है।
दस्तावेज खंगालने पर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, जिसमें 6 अलग-अलग ठेका कंपनियों ने एक ही रेट कोट किया है। इन सभी कंपनियों को एल वन मानकर ठेका दिया गया है।
आकाश तिवारी ने कहा कि रायपुर नगर निगम हर साल वार्डों में टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई के लिए टेंडर जारी करता है, लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता नजर नहीं आती। उनका आरोप है कि पिछले साल जिन 6 फर्मों को टेंडर मिला था, इस साल भी उन्हीं को काम सौंप दिया गया।
नेता प्रतिपक्ष ने जिन फर्मों का नाम लिया उनमें मेसर्स केशव प्रसाद पांडे, प्रज्ञा कंस्ट्रक्शन, परिमल कश्यप, अरविंद सिंह ठाकुर, प्रवीण दीक्षित और रफीक अहमद शामिल हैं। तिवारी ने सवाल उठाया कि आखिर हर साल यही फर्में कैसे चयनित हो जाती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि निविदा की शर्तें भी इन्हीं ठेकेदारों के हिसाब से तय की जाती हैं। तिवारी ने कहा कि सभी निविदा दाताओं के रेट और तारीख एक जैसे होना भी संदेह पैदा करता है।
आकाश तिवारी ने दावा किया कि पिछले वर्ष लगभग 1 करोड़ रुपए का टेंडर जारी हुआ था, लेकिन बाद में टैंकर संचालन के नाम पर करीब 2.06 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि पिछले साल इतना भुगतान हुआ था तो इस बार टेंडर राशि उसी आधार पर तय होनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि टेंडर राशि कम रखी जाती है और बाद में भुगतान बढ़ा दिया जाता है, जिससे बीच के अंतर पर सवाल खड़े होते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि टैंकरों में GPS सिस्टम लगाने की बात लंबे समय से हो रही है, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। उनका कहना है कि बिना GPS मॉनिटरिंग के टैंकर संचालन और पानी सप्लाई की वास्तविक स्थिति की जांच मुश्किल है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर नगर निगम में सिर्फ इन्हीं 6 निविदा दाताओं को लगातार काम क्यों मिल रहा है और क्या इनके पीछे कोई एक बड़ा ठेकेदार काम कर रहा है?
आकाश तिवारी ने पूरे टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि मिलीभगत साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि टैंकर टेंडर की प्रक्रिया भ्रष्टाचार को जन्म दे रही है।

