बैंकिंग सीज पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : अदालत बोली- पुलिस बिना मजिस्ट्रेट के आदेश बैंक खाते पर होल्ड नहीं लगा सकती

बैंकिंग सीज पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : अदालत बोली- पुलिस बिना मजिस्ट्रेट के आदेश बैंक खाते पर होल्ड नहीं लगा सकती

बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 21 मई । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी अपराध की जांच के दौरान पुलिस किसी व्यक्ति या संस्था के बैंक खाते में राशि पर होल्ड अथवा अटैचमेंट नहीं लगा सकती, जब तक कि इसके लिए सक्षम मजिस्ट्रेट का आदेश प्राप्त न किया गया हो।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने ओक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस द्वारा बैंक खाते में 43.38 लाख रुपए होल्ड करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया।

मामले के अनुसार मंदिरहसौद थाना क्षेत्र में टीएमटी सरियों की आपूर्ति में कथित कमी और धोखाधड़ी की शिकायत पर अपराध दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने पहले याचिकाकर्ता एनबीएफसी कंपनी का बैंक खाता फ्रीज कर दिया और बाद में 53.47 करोड़ रुपए पर होल्ड लगाने के निर्देश दिए। बाद में यह राशि घटाकर 43.38 लाख रुपए कर दी गई थी। कंपनी ने इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वह एफआईआर में आरोपी नहीं है और उसके खिलाफ किसी प्रकार की प्रत्यक्ष जांच भी नहीं चल रही है। इसके बावजूद बैंक खाते को फ्रीज कर देना और बड़ी राशि पर होल्ड लगाना कानून सम्मत नहीं है। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कथित आर्थिक नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया था।

डिविजन बेंच ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 106 और 107 का विस्तृत परीक्षण करते हुए कहा कि धारा 106 के तहत पुलिस केवल संदिग्ध संपत्ति जब्त कर सकती है और बाद में मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देती है, जबकि किसी संपत्ति या बैंक खाते में राशि पर अटैचमेंट अथवा होल्ड लगाने की कार्रवाई केवल धारा 107 के तहत मजिस्ट्रेट के आदेश से ही संभव है।

अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक पूर्व निर्णय का भी हवाला देते हुए कहा कि बैंक खाते पर डेबिट फ्रीज या होल्ड लगाना धारा 106 के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

अदालत ने कहा कि जब कथित नुकसान की राशि भी स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं थी, तब पुलिस द्वारा बैंक खाते में 43.38 लाख रुपए होल्ड करना कानूनन उचित नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर 13 अप्रैल और 27 अप्रैल 2026 के दोनों आदेश रद्द कर दिए गए।

हालांकि कोर्ट ने जांच एजेंसी को कानून के अनुसार धारा 107 के तहत आगे की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी है तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उप पुलिस अधीक्षक से कम रैंक के अधिकारी को जांच न सौंपने की अपेक्षा जताई है।

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