दुर्ग जनपद CEO पर गिरी गाज : बीजेपी कार्यकर्ता से बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर ने किया सस्पेंड

दुर्ग जनपद CEO पर गिरी गाज : बीजेपी कार्यकर्ता से बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर ने किया सस्पेंड

दुर्ग(अमर छत्तीसगढ़) 1 जून । छत्तीसगढ़ के दुर्ग में जन समस्या निवारण शिविर के दौरान एक अधिकारी पर जनता से अभद्र व्यवहार का आरोप लगते ही मामला तूल पकड़ गया। वीडियो वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया, जांच के बाद CEO रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। उनकी जगह प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग महेन्द्र कुमार जांगड़े को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

दरसअल, ग्राम थनौद में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर के दौरान जनपद पंचायत दुर्ग के CEO रूपेश कुमार पाण्डेय का कथित अभद्र व्यवहार अब उनके निलंबन की वजह बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। मामला सीधे संभाग आयुक्त तक पहुंचा। जांच हुई और कार्रवाई भी।

शिविर के दौरान आम लोगों से बातचीत करते समय अधिकारी का व्यवहार मर्यादित नहीं था। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ी। सरकारी कार्यक्रम में जनता से अभद्रता का आरोप लगने के बाद प्रशासन के लिए चुप रहना मुश्किल हो गया। वीडियो ने पूरे मामले को सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद शिकायतों का सिलसिला भी शुरू हुआ।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग कलेक्टर ने रिपोर्ट भेजी गई। जिसके बाद वीडियो क्लिप का परीक्षण किया गया। प्रारंभिक जांच में अधिकारी के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही पाया गया। आयुक्त कार्यालय ने माना कि, शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही हुई है। साथ ही आम नागरिकों के प्रति अशिष्ट व्यवहार भी सामने आया है। यही आधार निलंबन कार्रवाई का कारण बना।

इस मामले को लेकर 30 मई को रूपेश कुमार पाण्डेय को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया। अधिकारी ने जवाब प्रस्तुत किया। लेकिन आयुक्त कार्यालय को वह संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद विभागीय कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। महज दो दिन के भीतर निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।

आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि शासकीय सेवकों को सत्यनिष्ठ, कर्तव्यनिष्ठ और जनता के प्रति शिष्ट होना चाहिए। यह जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों में तय की गई है। यह पाया गया कि संबंधित अधिकारी इन मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसी वजह से उनके खिलाफ कदाचार और लापरवाही का मामला माना गया। संभाग आयुक्त ने नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

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