नारी की नजर निची होनी चाहिए और पुरूष की नियत ऊंची होनी चाहिए यही हमारी संस्कृति- महासती श्री पराग

नारी की नजर निची होनी चाहिए और पुरूष की नियत ऊंची होनी चाहिए यही हमारी संस्कृति- महासती श्री पराग


ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 14 जुलाई। आचार्य श्री रामेश व उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म सा की विशेष कृपा से समता भवन मे लगातार नैतिकता पर प्रवचन चल रहा है शासन दीपिका श्री पराग श्री जी म सा ने कहा आज के समय साधु को पांच महाव्रत पालना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि आगम का ज्ञान न साधु को न श्रावको को है इस कारण साधु को साधुजीवन का न श्रावक को श्रावकजीवन का नोलेज नही है, इस कारण हम आज साधु को पहचान नही पाते हमे साधु को पहचाने की बुद्धि होनी चाहिए।


म सा ने कहा वैरागहीन साधु शोभा नहीं पाया जाता यानि बिना वैराग के साधु बनना शोभा नही पाता क्योंकि उनके अंदर वैराग का अंकुरित नही पनपता,जिस साधु को वैराग नही उसके सामने मस्तक नही झुकाना चाहिए, साधु के अंदर त्याग भाव होनी चाहिए चोला पहनकर बैठ जाने से लोगो को सिर्फ भटका देता है,कषायो मे उलझता जाता है अपने कर्मो का बंध करता जाता।


म सा ने कहा साधु के मन मे संकल्प होने से वैराग मिलता है छोटे छोटे त्याग करने पर और प्रतिकूल परिस्थिति होने पर साधना सम्पन्न हो जाता है।त्याग बडी बात है उसी वजह से व्यक्ति मे वैराग उत्पन्न होता है।


म सा ने कहा नारी की नजर नीची नर की नियत ऊंची यही हमारी संस्कृति है, जिस नारी की आंखो मे लज्जा नही होती उसके गुण शुशोभित नही होते इसी प्रकार नर की नियत ऊंची होने पर साधना मे लीन रहते है, आज अधिकांश मानव राग द्बेष से जुडे है ऐसा कोई दिन नहीं होगा जो किसी न किसी वस्तु से राग करते जा रहे,जीसके जीवन से राग द्बेष की ग्रंथि निकल जाती वह व्यक्ति शोभनीय होता है।


इससे पहले साध्वी श्रीप्रखर श्री जी म सा ने कहा संकल्प से भंयकर बिमारी भी दूर हो जाता है जैसे अनादि मुनि, आचार्य श्री रामेश की बिमारी दूर हुई,पुदगलो की आसक्ति छोटा सा संकल्प से हट जाती है, एक निमित व्यक्ति को जाति स्मरण का ज्ञान प्राप्त जाता है जैसे मेघ कुमार को नंदन मुनि को हुआ।व्यक्ति प्रशंसा सुनकर अपने कर्मो का बंध कर लेता हैं।


म सा ने कहा प्रशंसा ऐसा मीठा जहर हे जो करने वाले को खा जाता और सुनने वाले को भी खा जाता,नेमीनाथ भगवान ने पशुओ की करूणा से आत्मा जाग गयी हमे भी इस थोडा मनुष्य जीवन से मुक्ति पाने के लिए आत्मा को मुक्ति की राह पर लगाना होगा। पुदगलो का निमित आत्मा को ऊपर उठाता और नीचे भी गिरा देता है।


संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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